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एनपीआर से नहीं घबराये मुसलमान, देनी है बस ये साधारण-सी जानकारी

देशभर में एनपीआर पर बवाल मचा हुआ है। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे है लेकिन सुनीं-सुनाई बातों पर भरोसा न करें। आज हम आपकों बताते है। एनपीआर क्या है। एनपीआर से मुस्लिम भाईयों को डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। एनपीआर क्यों है आवश्यक। क्या एनपीआर से नागरिकता में कोई फर्क पड़ेगा। इन सब सवालों के जवाब आज हम आपकों अपने इस वीडियो के माध्यम से देंगें।

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सबसे पहले तो एनपीआर का पूरा नाम जानते है। एनपीआर यानि नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर। अब आप इसका हिन्दी नाम जानिये। एनपीआर को हिन्दी में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्ट्रर कहते है। एनपीआर में परिवार के मुखिया और मकान समेत घर के सदस्यों की जानकारी देनी होती है। इससे मुस्लिम भाईयों को बिल्कुल भी डरने की जरूरत नहीं है। आज हम आपको एनपीआर से जुड़ी हर जानकारी देने जा रहे हैए जिन्हें लोग गलत दिशा में ले जा रहे है। आज हम आपको बतायेंगे की एनपीआर क्या है, इसमें क्या-क्या और किन-किन बिंदुओं को दर्शाया गया है। आखिर क्यों एनपीआर देश के लिए जरूरी है और हमारे मुस्लमान भाइयों का कोई भी बाल बाका नहीं कर सकता है।

आइये सबसे पहले जानते है क्या है एनपीआर

एनपीआर भारत में रहने वाले निवासियों का एक रजिस्टर है। इसे ग्राम पंचायत, तहसील, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। नागरिकता कानून 1955 और सिटिजनशिप रूल्स 2003 के प्रावधानों के तहत पॉपुलेशन रजिस्टर तैयार होता है। भारत के प्रत्येक सामान्य निवासी के लिए एनपीआर में पंजीकरण होना अनिवार्य है। वह व्यक्ति जो 6 महीने या उससे अधिक समय से किसी इलाके में रह रहा हो तो उसे नागरिक रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। देश के हर निवासी की पूरी पहचान और अन्य जानकारियों के आधार पर उनका डेटाबेस तैयार करना एनपीआर का ये अहम उद्देश्य है।

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एनपीआर के आधार पर केंद्र सरकार अपनी योजना तैयार करती है। इसके अलावा धोखाधड़ी रोकने और हर परिवार तक सरकारी स्कीम का लाभ पहुंचाने के लिए एनपीआर का इस्तेमाल होता है। लेकिन लोगों ने एनपीआर को लेकर कई भ्रामक बातें फैलाई हैं जोकि बिल्कुल गलत है। खासकर मुस्लिम भाइयों को लेकर लगातार अफवाहें फैलाई जा रही है। सोशियो इकोनॉमिक कास्ट सेंसस… एनपीआर डेटा पर आधारित है, जिसे बाद में विभिन्न तरह के लाभार्थियों को लाभ देने के लिए तय किया गया था। भारत सरकार की आयुष्मान भारत, जन धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना आदि योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए घरेलू वार एनपीआर डेटा का उपयोग किया है।

वर्ष 2010 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्‍व में बनी यूपीए सरकार ने एनपीआर बनाने की पहल की थी। इसके बाद वर्ष 2011 में जनगणना के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। अब जबकि वर्ष 2021 में दोबारा जनगणना होनी है तो एनपीआर पर भी काम जल्‍द ही शुरू हो जाएगा। ऐसे में किसी भी तरह से डरने वाली कोई बात ही नहीं है। लोग एनपीआर का सही उद्देश्य समझने को तैयार ही नहीं है। हालांकि कई राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे है। अभी तक हमारे द्वारा दी गई जानकारी अगर आपकी समझ में आई हो तो आप ही, बताइये क्या एनपीआर गलत है।

एनपीआर को लेकर पश्चिम बंगाल और केरल के मुख्यमंत्रियों ने पहले ही अपने राज्य में एनपीआर लागू नहीं करने की बात कही है। असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने कहा है कि एनपीआर, एनआरसी का ही दूसरा रूप है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ओवैसी पहली बार 2004 में हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए थे। जिसके बाद देश के गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि एनपीआर में आम आदमी की सूचना देंगे, उसके आधार पर जानकारियां एकत्रित की जाएंगी, इसके लिए आपसे कोई भी दस्तावेज़ नहीं मांगा जाएगा। लेकिन लोग सबकुछ जानने के बावजूद भ्रामक बयानों में आकर खुद देशहित में बाधक बन रहे है। एनपीआर के पंजीयन फार्म की जानकारी हम आपको अपने अगले वीडियो में देंगे। जिसमें हम आपकों बतायेंगे कि कौन-कौन से कॉलम रजिस्ट्रर में भरे जाते है। कुल कितने कॉलम रजिस्ट्रर में भरे जाते है। यह जानकारी आप कैसे देंगे।
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