कडक़नाथ कैसे है मुनाफे का सौदा… जानिए कडक़नाथ मुर्गी पालन की पूरी जानकारी

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कडक़नाथ मुर्गी पालन – चिकन तो हर कोई खाता है और जो नहीं भी खाता है उसे भी मुर्गे यानी की चिकन के बारे में अच्छे से जानकारी होगी। पर क्या काले चिकन के बारे में जानते हैं शायद ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं। जी हां काला मुर्गा आसानी से उपलब्ध नहीं होता है और यह देश के कुछ हिस्सों में ही पाया जाता है। इस काले मुर्गे को कडक़नाथ चिकन के नाम से जाना जाता है। आजकल यह कडक़नाथ चिकन लोगों का बिजनेस करने का एक बहुत ही शानदार जरिया बन चुका है। अगर आपके पास 1000 काले मुर्गे हैं तो आप लाखों की कमाई बहुत ही कम दिनों में कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं  कडक़नाथ मुर्गी पालन का बिजनेस कैसे किया जा सकता है।

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कडक़नाथ मुर्गे का बिजनेस

अगर आप इस मुर्गे का बिजनेस करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी होगी। अगर आप 100 चिकन रख रहे हैं तो आपको 150 वर्ग फीट की जगह की जरुरत होगी। तो वहीं अगर आपको 1000 काले मुर्गे रखने हैं तो आपको 1500 वर्ग फीट की जगह की जरुरत होगी। मुर्गे का फॉर्म गांव या शहर से बाहर मेन रोड से दूर हो, पानी या बिजली की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। हो सके तो फॉर्म उंचाई पर हो ताकि पानी का जमाव आस-पास न हो। लकड़ी का शेड बनाकर इस मुर्गे को बहुत आसानी से पाला जा सकता है। एक मुर्गे के लिए करीब 2 स्क्वायर फीट जगह की जरूरत होती है। एक शेड में हमेशा एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए। पानी पीने के बर्तन दो-तीन दिन में जरुर साफ करें। फॉर्म में हवा और पर्याप्त रोशनी हो।

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25 रुपए में एक अण्डा और 500 रुपए में एक मुर्गा

आपको बता दें कि कडक़नाथ मुर्गे का एक अण्डा जहां 50 रुपए का मिलता है तो वहीं एक मुर्गा आपको 500 रुपए में मिलेगा। तो वहीं एक दिन की चूजे की कीमत आपको 70 रुपए चुकानी होगी। अगर आप फुटकर बाजार से काला मुर्गा खरीदते हैं तो हो सकता है आपको 350 से 450 रुपए तक मिल जाए और अण्डा 25 रुपए तक में मिल सकता है।अगर आप भी कडक़नाथ का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो इसके लिए समय-समय पर कृषि विज्ञान केंद्रों में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा राज्यों के पशुपालन विभाग में भी इसकी पूरी जानकारी ले सकते हैं।

कडक़नाथ के पालन में इन बातों का रखना होगा ध्यान

चूंजों और मुर्गियों को अंधेरे में या रात में खाना नहीं देना चाहिए। मुर्गी के शेड में प्रतिदिन कुछ घंटे प्रकाश की आवश्यकता भी होती है। दो पोल्ट्री फॉर्म एक-दूसरे के करीब न हों। एक शेड में हमेशा एक ही ब्रीड के चूजे रखने चाहिए। पानी पीने के बर्तन दो-तीन दिन में जरुर साफ करें। फॉर्म में हवा और पर्याप्त रोशनी हो। इन दिनों कडक़नाथ मुर्गा पालना फायदे का कारोबार कहा जा रहा है। इसकी कई वजह हैं, एक तो ये महंगा बिकता है। इसके रखरखाव में लागत कम है, दूसरा ये खाने वाले को कई बीमारियों में फायदा पहुंचाता है। मध्य प्रदेश का झबुआ जिले की ये प्रजाति अब यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा-पंजाब समेत कई राज्यों में पानी जाने लगी है। झबुआ में इसकी हैजरी (बच्चे) बड़ा उद्योग बन गई है।

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कडक़नाथ व अन्य मुर्गों में अंतर

कडक़नाथ और दूसरे मुर्गे की तुलना मेंं, “एक किलो का मुर्गा तैयार करने में 85-90 रुपए का खर्च आ रहा है और बाजार में उसका रेट 67 रुपए किलो है यानि किसान को सीधे 20-25 रुपए किसान का घाटा होता है। वहीं कडक़नाथ मुर्गे को अगर बाग में पाल रहे है तो कोई खर्चा नहीं, लेकिन अगर बाग नहीं है तो एक किलो तैयार करने में 200 रुपए लगेंगे और बाजार में पौष्टिकता होने के कारण यह 500 से 900 रुपए किलो में बिक जाता है।’ “इनमें किसी भी प्रकार की कोई भी बीमारी नहीं होती है। बस शुरू के दिनों में तापमान का ध्यान रखना होता है। ब्रायलर और लेयर में वैक्सीन का भी खर्च आता है जबकि ऐसी कोई वैक्सीन नहीं लगती है।”

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कडक़नाथ सेहत के लिए फायदेमंद

कडक़नाथ मुर्गे को कालीमासी भी कहते हैं। ये खाए जाने वाले सफेद मुर्गे से कई गुना पौष्टिक होता है। इसमें आयरन काफी अधिक होता है और फैट एकदम कम। पशुपालन विभाग, महाराष्ट्र के मुताबिक, इसका रखरखाव अन्य मुर्गों के मुकाबले आसान होता है। शोध के अनुसार, इसके मीट में सफेद चिकन के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और अमीनो एसिड का स्तर ज्यादा होता है। कडक़नाथ के मीट और अंडे की मांग बढ़ी है। इसका स्वाद भी बायलर और देशी मुर्गे से अलग होता है।

इसका मीट कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोगियों के लिए यह बहुत ही फायदेमंद होता है।” कडक़नाथ के एक किलोग्राम के मांस में कॉलेस्ट्राल की मात्रा करीब 184 एमजी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में करीब 214 एमजी प्रति किलोग्राम होती है। इसी प्रकार कडक़नाथ के मांस में 25 से 27 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि अन्य मुर्गों में केवल 16 से 17 प्रतिशत ही प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा, कडक़नाथ में लगभग एक प्रतिशत चर्बी होती है, जबकि अन्य मुर्गों में 5 से 6 प्रतिशत चर्बी रहती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • 100 चिकन से इसका पालन शुरू किया जा सकता है।
  • अन्य फार्मों की तरह की इसका फार्म भी गाँव या शहर से बाहर मेन रोड में बनाना चाहिए।
  • बिजली और पानी की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
  • मुर्गी के शेड में प्रतिदिन कुछ घंटे प्रकाश की आवश्यकता भी होती है।
  • फॉर्म में हवा और पर्याप्त रोशनी हो।
  • साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
  • चूजों और मुर्गियों को अंधेरे में या रात में खाना नहीं देना चाहिए।
  • दो पोल्ट्री फॉर्म एक-दूसरे के करीब न हों। पानी पीने के बर्तन दो-तीन दिन में जरुर साफ करें।
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