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देहरादून- जैविक खेती को लेकर सरकार ने बनाया नया कानून, किसानों को ऐसे पहुंचेगा फायदा

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Uttarakhand Organic Farming, पिछले कुछ वर्षों में पहाड़ों से किसानों के पलायन के कारण खेती बर्बादी की कगार पर पहुंचती जा रही है। उत्तराखंड में किसानों वह खेती में सुधार लाने के लिए सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर नये प्रयास कर रही है। उत्तराखंड राज्य में जैविक खेती को संवारने के लिए केन्द्र ने 1500 करोड़ की योजना को मंजूरी दे दी है।

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Uttarakhand Organic Farming act

इस योजना पर काम करने के साथ ही उत्तराखंड को देश के दूसरे जैविक राज्य की पहचान दिलाने की कोशिश की जाएगी। अभी तक सिक्किम देश का पहला राज्य है जिसे 2016 में गंगटोक में आयोजित कृषि सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैविक राज्य घोषित किया था और इसके साथ ही उत्तर पूर्व के अन्य हिमालयी राज्यों में जैविक कृषि को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वही इसको बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नये कानून भी लागू कर दिया है।

जैविक खेती के लिए बना कानून

उत्तराखंड में जैविक खेती को ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके लिए राज्य कैबिनेट की बैठक में एग्रीकल्चर ऑर्गेनिक एक्ट पर मुहर लगा दी गई है। इसके बाद अब प्रदेश में ऑर्गेनिक खेती को न केवल बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों को उत्पाद के बेहतर दाम भी मिल सकेंगे। जिसके बाद से उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां जैविक खेती के लिए अलग से एक्ट को पास करवाया गया है।

राज्य कैबिनेट में इस विधेयक के बाद अब किसानों को जैविक खेती पर न केवल बेहतर दाम मिलेंगे बल्कि उत्तराखंड के जैविक उत्पादों को ब्रांड के रूप में भी स्थापित किया जा सकेगा। ये विधेयक राज्य में जैविक कृषि उत्पादों के निर्यात और व्यापार प्रसंस्करण में लगी डिजीन एजेंसियों, एनजीओ आदि को भी विनियमित किया करेगा। राज्य में अधिसूचित क्षेत्रों के 10 विकासखंडों में रासायनिक और सिंथेटिक उर्वरकों, कीटनाशकों, पशु चिकित्सा दवाओं, पशु चारा आदि की बिक्री को विनियमित किया जाएगा। इसके साथ ही विधेयक के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्रों में प्रतिबंधित पदार्थों की बिक्री करने पर सजा का प्रावधान भी रखा गया है।

Uttarakhand Organic Farming act

इसके तहत एक लाख का जुर्माना और एक साल की सजा भी हो सकती है। इस कानून की खास बात ये है कि कैबिनेट बैठक में जैविक खेती को लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय किया जाने पर फैसला लिया गया है। जबकि मंडी परिषद द्वारा जैविक उत्पादों को खरीदने के लिए रिवाल्विंग फंड स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया है। कैबिनेट बैठक में हॉर्टिकल्चर को लेकर भी निर्णय लिए गए हैं। अब उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य होगा, जहां पर किसानों से धोखा करने की स्थिति में सजा और जुर्माने का प्रावधान होगा।

जैविक खेती करने के फायदे

जैविक खेती से होने वाले फायदे और नुकसान एक बार फिर चर्चा में हैं। जैविक खेती से अपेक्षाकृत लाभ तो कम है, लेकिन धीरे धीरे इसे फायदे का सौदे के रूप में स्वीकार किया जाने लगा है। रासायनिक छिड़काव और पेस्टीसाइड से भले ही किसानों को अधिक पैदावार मिल जाती है, लेकिन अक्सर इसमें लाभ से कहीं अधिक नुकसान ही रहा है। एक तरफ जहां इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति ख़त्म होती है।

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वहीं दूसरी ओर यह भूजल में मिलकर प्राकृतिक जल स्रोतों को भी दूषित कर रहा है। इन दोनों सूरतों में खामियाज़ा इंसानी ज़िंदगी को गंभीर बिमारी के रूप में चुकाना पड़ रहा है। इन सब के अलावा इस खेती के कई अन्य फायदे भी है।

-जैविक खेती से भूमि की उपजाऊ क्षमता में वृद्धि हो जाती है।
-सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है।
-रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।
-फसलों की उत्पादकता में वृद्धि।
-बाज़ार में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।