उत्तराखंड - यहाँ मदरसों में बाहरी बच्चों को लाकर कट्टर बनाने का मामला, जांच शुरू

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उत्तराखंड- यहाँ मदरसों में बाहरी बच्चों को लाकर कट्टर बनाने का मामला, जांच शुरू

देहरादून - मदरसों में बाहरी बच्चों को लाकर कट्टर बनाने का मामला सामने आने के बाद देहरादून जिले के उन अपंजीकृत मदरसों की फाइल फिर खुल गई है, जो सवा साल पहले अंपजीकृत पाए गए थे।

 

जनवरी-2025 में सामने आई जांच रिपोर्ट में जिले में 35 मदरसे ऐसे मिले थे, जो बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे थे। जिला प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया था कि इन अपंजीकृत मदरसों में तीन हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत थे। इसी बीच अन्य राज्यों से बच्चों को मदरसों में लाए जाने की आशंका पर शासन ने अलग से जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।


कुल 90 मदरसों का संचालन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी उपजिलाधिकारियों से जिले में संचालित मदरसों की विस्तृत जानकारी तलब की थी। इसमें पंजीकरण की स्थिति, छात्र संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता और मूलभूत सुविधाओं का विवरण शामिल किया गया।


उपजिलाधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार जिले में कुल 90 मदरसों का संचालन पाया गया था, जिनमें 35 मदरसे उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं थे। एक मदरसे का नवीनीकरण लंबित था, जबकि कुछ ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया हुआ था। प्रशासन के अनुसार जिले के इन 90 मदरसों में कुल 9720 छात्र दर्ज हैं। इनमें से केवल 35 अपंजीकृत मदरसों में ही तीन हजार से अधिक छात्र पढ़ रहे थे।

 

विकासनगर में सबसे अधिक छात्र संख्या - 
तहसीलवार स्थिति में विकासनगर सबसे आगे था, जहां 60 मदरसों में से 18 अपंजीकृत थे। देहरादून सदर में 23 में से 10, डोईवाला में छह के छह और कालसी में एक मदरसा बिना पंजीकरण संचालित मिला था। छात्र संख्या के लिहाज से विकासनगर में 6031 छात्र मदरसों में अध्ययनरत देहरादून सदर में 2750, डोईवाला में 884 और कालसी में 55 छात्र दर्ज किए गए थे।

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