उत्तराखंड - इंटरनेट मीडिया ने बिगाड़ा तरबूज का स्वाद, मंडी में दो रुपये किलो भी नहीं मिल रहे खरीदार, ट्रॉली पलट गया किसान 
 

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उत्तराखंड - इंटरनेट मीडिया ने बिगाड़ा तरबूज का स्वाद, मंडी में दो रुपये किलो भी नहीं मिल रहे खरीदार, ट्रॉली पलट गया किसान 

उत्तराखंड - भीषण गर्मी और लू के बीच जहां आमतौर पर तरबूज की मांग बढ़ जाती है, वहीं इस बार इंटरनेट मीडिया पर फैली खबरों ने तरबूज की बिक्री पर बड़ा असर डाला है। हालत यह है कि रुड़की मंडी में तरबूज दो रुपये किलो तक बिकने को तैयार है, लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे हैं। दरअसल, पिछले माह महाराष्ट्र में तरबूज खाने से चार लोगों की मौत की खबर इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुई थी। इसके बाद लोगों में डर का माहौल बन गया। उत्तराखंड खाद्य संरक्षा विभाग ने भी एहतियातन रुड़की और ज्वालापुर मंडियों में तरबूज समेत अन्य फलों के नमूने जांच के लिए भेजे थे। हालांकि जांच रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन अफवाहों का असर सीधे बाजार पर दिखाई दे रहा है।

 

रुड़की मंडी में इन दिनों स्थानीय किसानों द्वारा नदी-नालों के किनारे उगाई गई तरबूज की फसल की प्रतिदिन करीब 100 क्विंटल आवक हो रही है, लेकिन मांग लगभग खत्म हो चुकी है। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से भी तरबूज की सप्लाई बंद हो गई है। स्थिति इतनी खराब हो गई कि शुक्रवार को कोटा गांव के किसान संजय अपनी मिनी ट्राली भरकर मंडी पहुंचे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई खरीदार नहीं मिला। निराश होकर किसान ने मंडी परिसर में ही तरबूज से भरी ट्राली पलट दी और वापस लौट गया।

 

रुड़की मंडी सचिव पंकज शाह ने बताया कि इस बार तरबूज की मांग बेहद कम है। मंडी में केवल स्थानीय किसान ही तरबूज लेकर आ रहे हैं। बिक्री प्रभावित होने से किसानों के साथ-साथ मंडी प्रशासन को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि तरबूज पर डेढ़ प्रतिशत मंडी शुल्क वसूला जाता है।

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