उत्तराखंड - साल 2025 में आपदा दे गई 2013 जैसा खंजर, इतने हजार करोड़ का नुकसान, अब तक 79 लोगों की मौत
देहरादून - साल 2025 उत्तराखंड के लिए प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद भयावह साबित हुआ है। राज्य में इस वर्ष अब तक 5000 करोड़ रुपए से अधिक की आर्थिक क्षति हो चुकी है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, यह नुकसान वर्ष 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद सबसे बड़ा है।
आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के सभी जिलों और संबंधित विभागों से आपदा से हुए नुकसान की रिपोर्ट मंगवाई थी। अब इन सभी रिपोर्टों को एकत्र कर नुकसान का आकलन कर लिया गया है। विभाग जल्द ही एक विस्तृत मेमोरेंडम भारत सरकार को सौंपेगा, ताकि केंद्र से आर्थिक सहायता प्राप्त की जा सके।
अत्यधिक बारिश बनी तबाही की वजह -
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अगस्त में सामान्य से दोगुनी बारिश हुई। जहां पहले अगस्त में औसतन 300 से 350 मिमी बारिश होती थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा 574 मिमी तक पहुंच गया। यही कारण है कि बारिश के कारण भूस्खलन, सड़कों का टूटना, पुलों का बह जाना और कई मकानों को नुकसान जैसी घटनाएं तेजी से सामने आई हैं।
मौसम विभाग ने सितंबर में भी सामान्य से अधिक बारिश की चेतावनी दी है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वालों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
अब तक 79 मौतें, 115 घायल -
आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस आपदा सीजन में अब तक 79 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 115 से अधिक लोग घायल हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान यात्रा से बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
केंद्र सरकार की टीम करेगी नुकसान का आकलन -
आपदा प्रबंधन विभाग ने जानकारी दी है कि भारत सरकार द्वारा गठित एक विशेष टीम अगले हफ्ते सोमवार या मंगलवार को उत्तराखंड पहुंचेगी। यह टीम आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मौके पर नुकसान का आकलन करेगी। राज्य सरकार की ओर से सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट रहने और आपदा से निपटने के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड में मौसम की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन ने आम जनता और यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें और अनावश्यक यात्रा से बचें।
