उत्तराखंड - अटल आयुष्मान योजना बनी गरीबों के लिए संजीवनी, इन सात गंभीर बीमारियों का होगा फ्री इलाज

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उत्तराखंड - अटल आयुष्मान योजना बनी गरीबों के लिए संजीवनी, इन सात गंभीर बीमारियों का होगा फ्री इलाज

देहरादून - उत्तराखंड में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस योजना के तहत गंभीर और महंगे रोगों का इलाज अब पूरी तरह निश्शुल्क हो रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बड़ी राहत मिली है। राज्य में अब तक 17 लाख से अधिक मरीज इस योजना के माध्यम से उपचार प्राप्त कर चुके हैं।

केंद्र सरकार द्वारा 23 सितंबर 2018 को शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना को उत्तराखंड सरकार ने और व्यापक रूप देते हुए अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के रूप में लागू किया। इसके अंतर्गत प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 56.95 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।

महंगे इलाज अब आमजन की पहुंच में - 
योजना के तहत किडनी ट्रांसप्लांट, डायलिसिस, हृदय रोग, कैंसर, न्यूरोसर्जरी, नेत्र रोग तथा हिप और नी रिप्लेसमेंट जैसे अत्यंत महंगे इलाज निश्शुल्क किए जा रहे हैं। इससे न केवल मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल रहा है, बल्कि उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम हुआ है।

70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को अतिरिक्त लाभ - 

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि जिन परिवारों में 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हैं, उन्हें परिवार के पांच लाख रुपये के कवर के अतिरिक्त पांच लाख रुपये का व्यक्तिगत बीमा कवर भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज से भुगतान की मांग की जाती है, तो इसकी शिकायत आयुष्मान प्राधिकरण में की जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना ने महंगे और जटिल इलाज को आम जनता की पहुंच में ला दिया है। यह योजना न केवल मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की एक मजबूत मिसाल भी बन चुकी है।

 

गंभीर बीमारियों में अब तक हुआ निश्शुल्क उपचार

डायलिसिस – 2,67,397 मामले | ₹177.61 करोड़

कार्डियोलॉजी (स्टेंट, ओपन हार्ट) – 39,642 मामले | ₹345.14 करोड़

ऑन्कोलॉजी (कीमो, रेडियोथेरेपी, सर्जरी) – 79,653 मामले | ₹221.34 करोड़

न्यूरोसर्जरी – 11,820 मामले | ₹59.05 करोड़

किडनी ट्रांसप्लांट – 25 मामले | ₹54 करोड़

हिप रिप्लेसमेंट – 2,743 मामले | ₹28.24 करोड़

नी रिप्लेसमेंट – 2,453 मामले | ₹21.32 करोड़

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