नैनीताल - जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण कांड में हल्द्वानी के कुख्यात ITI गैंग का भी हाथ, रात में मतगणना पर भी उठे सवाल! 

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नैनीताल - जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण कांड में हल्द्वानी के कुख्यात ITI गैंग का भी हाथ, रात में मतगणना पर भी उठे सवाल 

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सोमवार को नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका चुनाव के दिन सुरक्षा व्यवस्था, निष्पक्षता और कथित अपहरण के मामलों को लेकर दाखिल की गई थी। कोर्ट ने इस मामले में SSP नैनीताल प्रहलाद नारायण मीणा और DM वंदना को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि मतदान केंद्र के 100 मीटर के भीतर जो कुछ भी हुआ, उसकी पूरी जानकारी शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट में पेश की जाए।


IIT गैंग का नाम, वायरल वीडियो में दिखे 13 गुंडे - 
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता देवेंद्र पाटनी ने कोर्ट को बताया कि घटना में शामिल कई लोग हल्द्वानी के कुख्यात IIT गैंग से जुड़े हैं। वायरल वीडियो में करीब 13 गुंडे दिख रहे हैं जो तलवारें लहराते हुए हाईकोर्ट के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते नजर आए। वीडियो में एक शख्स यह कहते भी सुना गया – “हमने उत्तराखंड को बिहार बना दिया।”

 

पंचायत सदस्यों की CDR पेश करने के निर्देश - 
कोर्ट ने आदेश दिया कि कथित रूप से अगवा किए गए पांचों सदस्यों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) पेश की जाए। SSP ने कोर्ट में स्वीकार किया कि इन सदस्यों का अपने परिवार से संपर्क नहीं हुआ था। हालांकि SSP ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो मतदान के दिन का नहीं है। 

मतगणना को लेकर भी उठा विवाद - 
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारी ने बिना प्रत्याशियों की मौजूदगी के रात 3 बजे मतगणना करवा दी। अधिवक्ता देवीदत्त कामथ ने कोर्ट में कहा, “यह लोकतंत्र की हत्या है। तीन बजे रात में मतगणना का कोई नियम नहीं है। अध्यक्ष का चुनाव दोबारा कराया जाए।”

निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन की सफाई - 
DM नैनीताल वंदना ने कहा कि सभी कार्यवाहियां निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई हैं और सभी प्रत्याशियों को समय पर सूचित किया गया था। मतदान केंद्र के भीतर कोई हंगामा नहीं हुआ, यह सब बाहरी क्षेत्र में हुआ – यह दावा सरकारी अधिवक्ताओं की ओर से किया गया।

फिलहाल सुनवाई स्थगित, अगली तारीख 19 अगस्त - 
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 19 अगस्त को तय की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह मामला केवल राजनीतिक नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था और लोकतंत्र की मर्यादा से जुड़ा है। अब सबकी निगाहें कल की सुनवाई पर टिकी हैं।

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