नैनीताल - हाईकोर्ट पर टिकी हैं प्रदेश की निगाहें, जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण मामले में सुनवाई, कोर्ट में SSP को पड़ी फटकार
नैनीताल - जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव और सदस्यों के अपहरण मामले में चल रही सुनवाई को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल एक बार फिर प्रदेशभर की नजरों का केंद्र बन गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सोमवार को पूरे शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। हाईकोर्ट परिसर से 500 मीटर की परिधि तक धारा 163 लागू कर दी गई है, जिससे नैनीताल पूरी तरह पुलिस छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।
मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ में आज जिला पंचायत अध्यक्ष, नैनीताल के चुनाव से जुड़ी याचिका पर अहम सुनवाई हो रही है। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं और उनके समर्थकों की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
नैनीताल हाईकोर्ट सख्त, SSP को लगाई फटकार -
नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव प्रकरण को लेकर उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान सोमवार को कोर्ट का रुख बेहद सख्त देखने को मिला। मुख्य न्यायाधीश ने SSP नैनीताल प्रहलाद नारायण मीणा को कड़ी फटकार लगाते हुए कई तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि नैनीताल सिर्फ पर्यटक स्थल नहीं है, यह हाईकोर्ट भी है।
हाईकोर्ट में पेश वायरल वीडियो पर जवाब देते हुए SSP ने उसका बचाव करने की कोशिश की, जिस पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई और पूछा, "क्या हम अंधे हैं?" कोर्ट ने तीखे लहजे में सवाल किया, "आपकी पुलिस फोर्स कहां थी? और शहर में हिस्ट्रीशीटर क्या कर रहे थे?" कोर्ट ने SSP पर आरोप लगाया कि वह अपराधियों का जबरन बचाव कर रहे हैं।
इस पर SSP ने कोर्ट से कहा कि वह 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करेंगे। लेकिन कोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। चीफ जस्टिस ने सरकारी वकील से सीधे कहा, "सरकार से कहिए कि SSP का ट्रांसफर कर दिया जाए।" हालांकि, सरकारी वकील ने SSP का बचाव करने की कोशिश की।
