उत्तराखंड - राज्य में गहराया बिजली संकट, टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां बंद, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी रोस्टरिंग
Uttarakhand Power Crisis - बारिश के बीच कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने और जलविद्युत उत्पादन में गिरावट के कारण उत्तराखंड में बिजली संकट गहरा गया है। पीक आवर्स में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच करीब 350 मेगावाट का अंतर बना हुआ है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण उद्योगों के साथ-साथ ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी रोस्टरिंग करनी पड़ रही है। कई इलाकों में घंटों बिजली कटौती हो रही है। यूपीसीएल के एमडी पीसी ध्यानी के मुताबिक, मौजूदा संकट की प्रमुख वजह जलविद्युत उत्पादन में कमी है। पीक आवर्स में यूजेवीएनएल का उत्पादन पिछले वर्ष के 1094 मेगावाट की तुलना में इस वर्ष करीब 912 मेगावाट रह गया है। इससे करीब 170 से 180 मेगावाट की कमी आई है। नदियों में जल प्रवाह कम होने का असर भी बिजली उत्पादन पर पड़ा है।
केंद्रीय स्रोतों से भी घटी बिजली उपलब्धता -
केंद्रीय स्रोतों से मिलने वाली बिजली भी पिछले वर्ष के 837 मेगावाट के मुकाबले घटकर करीब 715 मेगावाट रह गई है। वहीं, टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट की दो इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। इससे पीक आवर्स में करीब 100 मेगावाट क्षमता प्रभावित हुई है। यूनिट-5 को 18 जुलाई और यूनिट-6 को 15 सितंबर से बंद बताया गया है।
एक्सचेंज से सीमित बिजली मिलने से बढ़ी परेशानी -
बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित होने से कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर दबाव बढ़ा है। इसका असर बिजली एक्सचेंज पर भी पड़ा है। यूपीसीएल के अनुसार पीक आवर्स में एक्सचेंज से कुल जरूरत की केवल एक से दो प्रतिशत अतिरिक्त बिजली ही मिल पा रही है। शाम के समय ग्रिड फ्रीक्वेंसी 49.50 हर्ट्ज तक गिरने के कारण एनआरएलडीसी ने ओवरड्राल पर भी अंकुश लगाया है। ऐसे में राज्य के सामने उपलब्ध बिजली के प्रबंधन की चुनौती बढ़ गई है।
फर्नेस उद्योगों में 15 घंटे तक रोस्टरिंग -
बिजली की कमी का सबसे ज्यादा असर फर्नेस उद्योगों पर पड़ा है। 19-20 सितंबर को कुमाऊं और गढ़वाल में 14 घंटे 15 मिनट, 20-21 सितंबर को 13 घंटे 45 मिनट और 21-22 सितंबर को 15 घंटे तक रोस्टरिंग की गई। 22-23 सितंबर को रोस्टरिंग की अवधि 10 घंटे 40 मिनट रही। 23-24 सितंबर की रात रोस्टरिंग घटकर छह घंटे पांच मिनट रही। ग्रामीण क्षेत्रों में तीन से पांच घंटे तक बिजली कटौती की गई। रुड़की, हल्द्वानी, काशीपुर, रुद्रपुर और ज्वालापुर जैसे शहर भी बिजली संकट से प्रभावित रहे।
केंद्र से 100 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग -
स्थिति से निपटने के लिए यूपीसीएल लगातार बिजली एक्सचेंज से खरीद कर रहा है। इसके अलावा केंद्र से अलग-अलग महीनों के लिए 100 से 400 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग की गई है। 23 सितंबर शाम चार बजे से एक गैस आधारित मशीन को शेड्यूल किया गया है, जिससे करीब 90 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की उम्मीद है।
पीक आवर्स में अधिक उत्पादन पर जोर -
यूपीसीएल ने हाइड्रो जनरेटरों को पीक आवर्स में अधिकतम क्षमता पर चलाने के निर्देश दिए हैं। वहीं, सौर ऊर्जा उपलब्ध रहने के दौरान तकनीकी रूप से संभव सीमा तक जलविद्युत उत्पादन कम करने को कहा गया है, ताकि पानी को शाम के पीक डिमांड के दौरान इस्तेमाल किया जा सके।
अनुरक्षण से जुड़े कार्यों को रोस्टरिंग की अवधि में करने या फिलहाल स्थगित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बिजली उपलब्धता में सुधार होने तक राज्य में आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना यूपीसीएल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।


