नैनीताल - नेटवर्किंग कंपनियों के जाल में फंस रही हैं उत्तराखंड की बेटियाँ, गरमपानी से उठा मामला बना राज्यव्यापी चिंता का विषय
गरमपानी/देहरादून - उत्तराखंड के शांत पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली भोली-भाली युवतियों को नौकरी और आकर्षक वेतन का झांसा देकर एक बड़े नेटवर्किंग मार्केटिंग घोटाले में फंसाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हल्द्वानी, रामनगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और रानीखेत जैसे क्षेत्रों में सक्रिय नेटवर्किंग कंपनियों के एजेंट अब सवालों के घेरे में हैं।
इस गंभीर प्रकरण का खुलासा तब हुआ जब चोरगलिया निवासी युवती नीलम ने देहरादून स्थित एक नेटवर्किंग कंपनी के खिलाफ बंधक बनाने, दुर्व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में तहरीर दी। उसकी बहन सिमरन, जो किसी तरह अपने आपको और नीलम को बचाकर लाई, ने पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।
बेटियों की सुरक्षा पर सवाल -
सिमरन ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों की आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों को 20 हजार रुपये की मासिक तनख्वाह और सुविधाओं का लालच देकर कंपनियों में बुलाया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें न केवल बंधक बनाकर रखा जाता है, बल्कि परिजनों से पैसे मंगवाने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का दबाव भी बनाया जाता है।
करणी सेना और जनप्रतिनिधियों ने उठाई आवाज़ -
मामले के तूल पकड़ने के बाद करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष सूरज चौधरी ने इसे गंभीर सामाजिक संकट बताते हुए राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
वहीं, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिलीप सिंह बोहरा, विरेंद्र सिंह, फिरोज अहमद, मनीष तिवारी, गजेंद्र सिंह आदि ने भी इस घटना को शर्मनाक बताते हुए तुरंत जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो कई और बेटियाँ इस जाल में फंस सकती हैं।
प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल -
अब सवाल यह उठ रहा है कि देहरादून जैसे बड़े शहर में संचालित ऐसी कंपनियों की जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं थी? क्या यह लापरवाही है या मिलीभगत? इस घटना ने प्रदेशभर के ग्रामीण इलाकों में सनसनी फैला दी है और बेटियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता और गंभीरता से कार्रवाई करता है।
