नैनीताल - PhD करने वाली शिक्षिका को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने पलटा दिया शिक्षा विभाग के AD और DEO का आदेश 
 

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नैनीताल - शिक्षा विभाग में नौकरी करने के साथ ही PHD करने वाले छात्रों के लिए हाई कोर्ट ने एक बड़ा निर्णय सुनाया है। दरअसल एक हिंदी विषय की महिला को शिक्षा विभाग द्वारा हिंदी विषय में शोध करने के लिए अवकाश नहीं दिया जा रहा था, तो शिक्षिका ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया जहां कोर्ट ने महिला को बड़ी राहत देते हुए शिक्षिका को अवकाश नहीं देने से संबंधित शिक्षा विभाग के अपर शिक्षा निदेशक और जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया।


शिक्षा विभाग विज्ञान और तकनीकी में शोध के लिए देता है अवकाश - 
मामले के अनुसार हिंदी विषय (एलटी ग्रेड) की शोभा बुधलाकोटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती देकर कहा कि उन्हें पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए शिक्षा विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया गया था। उन्होंने अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन किया जिसे विभाग ने इस आधार पर अस्वीकृत कर दिया था कि इस प्रकार का अवकाश विज्ञान विषय और तकनीकी अध्ययन के लिए दिया जा सकता है। गैर तकनीकी विषयों यानि हिंदी में पीएचडी करने वालों को अध्ययन अवकाश की स्वीकृति नहीं दी जा सकती है।


याचिकाकर्ता शोभा बुधलाकोटी ने अदालत को बताया कि वह सहायक अध्यापिका हैं और हाल ही में उन्होंने शिक्षा विभाग से एनओसी लेकर हिंदी में पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है। पीएचडी पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अवकाश की आवश्यकता होती है। न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले कि सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि नियम को केवल वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तक सीमित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हिंदी विषय में कोई भी वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन नहीं किया जा सकता लेकिन इस विषय में पीएचडी करना अवश्य उच्च अध्ययन होगा। न्यायालय ने विभाग को आदेश दिया कि याचिकाकर्ता पहले से ही पीएचडी पाठ्यक्रम में पंजीकृत है और विभाग द्वारा एनओसी पहले ही दी जा चुकी है, इसलिए उसे ऐसे अवकाश से मना नहीं किया जा सकता है।