नैनीताल - हाईकोर्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष पर याचिका में सुनवाई की, जानिए सरकार और याचिकाकर्ता से कोर्ट ने क्या कहा
नैनीताल - उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से कहा कि वे भी संघर्ष को रोकने के लिए अपने सुझाव कोर्ट में प्रस्तुत करें।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अनु पंत की ओर से कहा गया कि पूर्व में अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों पर राज्य सरकार ने अब तक कोई ठोस एसओपी (Standard Operating Procedure) प्रस्तुत नहीं की है। उन्होंने बताया कि जनहित याचिका दायर होने के बाद से अब तक करीब 100 ग्रामीणों की वन्यजीव हमलों में मृत्यु हो चुकी है, जिनमें से कई को वन विभाग की ओर से मुआवजा नहीं दिया गया है।
सरकार ने दी अनुपालन रिपोर्ट, कोर्ट ने कहा—पर्याप्त नहीं -
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में सरकार ने अनुपालन रिपोर्ट पेश कर दी है। इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे उस रिपोर्ट का अध्ययन कर अपने सुझाव पेश करें, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।
अदालत ने यह भी कहा कि राज्य को इस दिशा में ठोस नीति बनानी होगी।
पूर्व में कोर्ट ने दो माह के भीतर राजाजी टाइगर कंजर्वेशन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के नेशनल पार्कों के सफल प्रबंधन मॉडल से सीख लेकर उत्तराखंड के लिए बेहतर टाइगर कंजर्वेशन प्लान तैयार किया जाए। लेकिन अब तक सरकार द्वारा दाखिल अनुपालन रिपोर्ट को अदालत ने पर्याप्त नहीं माना है।
विशेषज्ञ समिति और ठोस नीति की मांग -
याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में कहा है कि नवंबर 2022 में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव वन को निर्देश दिए थे कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति गठित की जाए।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक विनोद सिंघल द्वारा दायर शपथ पत्र में केवल कागजी कार्रवाई का उल्लेख था, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पिछले कुछ वर्षों में राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि हुई है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपने लिखित सुझाव अदालत में प्रस्तुत करें, ताकि समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल की जा सके।
