Loksabha Election - प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्री सियासत से दूर फरमा रहे आराम, महज त्रिवेंद्र रावत ही मैदान में 
 

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Uttarakhand Politics - प्रदेश की सियासत में अब पूर्व मुख्यमंत्रियों का बोलबाला कम हो गया है, भाजपा में इस समय छह पूर्व मुख्यमंत्री हैं और इनमें से पांच के पास संगठन का फिलहाल कोई बड़ा काम नहीं है। वहीं कांग्रेस से पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपनी सियासी विरासत अब पुत्र को सौंप दी है अब वह बेटे के सियासी रथ को हाँक रहे हैं। 


कभी सूबे में भाजपा तीन राजनीतिक क्षत्रपों खंडूड़ी-कोश्यारी-निशंक से पहचानी जाती थी। अब पार्टी में कई क्षत्रप हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी युवा चेहरा हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी, अजय टम्टा, त्रिवेंद्र सिंह रावत भाजपा की राजनीति की पहली पांत के नेताओं हैं और नए शक्ति केंद्र के तौर पर स्थापित हो रहे हैं। भाजपा ने अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आराम दे दिया है। 


कोश्यारी, खंडूरी, निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत, तीरथ सिंह रावत, 
भाजपा के उम्रदराज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी स्वास्थ्य कारणों से मुख्यधारा की राजनीति से काफी दूर हैं। पिछले कुछ वर्षों से उनकी कोई सक्रियता नहीं हैं। पूर्व राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी भी अब आराम पर हैं। हालांकि, उनकी सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता बनी है, लेकिन संगठन में उनकी भूमिका अब मार्गदर्शक की है। पूर्व सीएम विजय बहुगुणा भी केवल पार्टी के कुछ प्रमुख कार्यक्रमों तक सीमित हैं। उनकी राजनीतिक सक्रियता का उत्तरदायित्व अब उनके सुपुत्र सौरभ बहुगुणा धामी कैबिनेट में निभा रहे हैं।


निशंक और तीरथ को भाजपा ने घर बिठा दिया ?
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने बेशक दो ही सीटों पर नए चेहरों को उतारने का प्रयोग किया हो, लेकिन दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का टिकट काटकर पार्टी ने नए दौर की शुरुआत संकेत दे दिए हैं। डॉ. निशंक उत्तराखंड की राजनीति के एक प्रभावशाली चेहरा हैं। उनका गढ़वाल और कुमाऊं में प्रभाव रहा है। दोनों ही मंडलों में उनके समर्थक अच्छी-खासा संख्या में हैं। पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत का भी अपना प्रभाव है। प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री की भूमिका में उन्होंने कार्यकर्ताओं के बीच अलग पहचान बनाई है। सियासी दिग्गज डॉ. निशंक और तीरथ सिंह रावत का अभी काफी राजनीतिक कॅरियर शेष है, लेकिन संगठन के भीतर वापसी करने के लिए उन्हें अब काफी पसीना बहाना होगा।इस लिहाज से दोनों नेताओं के लिए वापसी करना बेशक चुनौतीपूर्ण हो, लेकिन नामुमिकन नहीं है।


कांग्रेस नेता हरीश रावत की पारी भी लगभग समाप्त की ओर - 
भाजपा में केंद्रीय संगठन के आगे बड़े नेताओं की एक न चलती हो लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आज भी अपने कांग्रेस संगठन में निर्णायक की भूमिका में रहते हैं, सियासी जानकारों की मानें तो रावत हरिद्वार से लोकसभा चुनावों में अपने बेटे के लिए टिकट मांगने में कामयाब रहे, लिहाजा बेटे को सियासत में उतारकर इसी के साथ रावत अब अपनी सियासी पारी को विराम दे सकते हैं।