उत्तराखंड - महिला पीजी डॉक्टर ने जहरीला इंजेक्शन लगाकर दी जान, डॉक्टर बनने का सपना टूटा, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
देहरादून - डॉक्टर बनने का सपना अब महज तीन महीने दूर था, लेकिन उससे पहले ही एक होनहार छात्रा की जिंदगी थम गई। नेत्र विज्ञान में एमएस की तृतीय वर्ष की पढ़ाई कर रही तन्वी की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। परिवार ने मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डा. प्रियंका गुप्ता पर मानसिक उत्पीड़न, आर्थिक दबाव और परीक्षा में फेल करने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मृतक तन्वी, हरियाणा के अंबाला शहर की निवासी थीं और सितंबर 2023 से पटेल नगर के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेस में नेत्र विज्ञान में एमएस की पढ़ाई कर रही थीं। वह देहरादून में अपनी मां के साथ रह रही थीं। मृतका के पिता डॉ. ललित मोहन के अनुसार, बेटी की पढ़ाई पर अब तक लगभग 90 लाख रुपये खर्च किए जा चुके थे और कोर्स पूरा होने में सिर्फ तीन महीने शेष थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में विभागीय माहौल ऐसा बना दिया गया था, जिससे तन्वी लगातार मानसिक तनाव में रहने लगी थी।
परिजनों का दावा है कि विभागाध्यक्ष द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक अपेक्षाएं जताई जाती थीं और परीक्षा परिणाम प्रभावित करने की चेतावनी दी जाती थी। आरोप है कि पहले जहां तन्वी को लॉगबुक में अच्छे अंक मिलते थे, वहीं बाद में शून्य अंक दर्ज किए गए, जिससे वह और अधिक दबाव में आ गई। पिता ने बताया कि उन्होंने पिछले चार महीनों में तीन बार विभागाध्यक्ष से मुलाकात कर बेटी के भविष्य को प्रभावित न करने की अपील की, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ।
परिवार के अनुसार, तन्वी का अपने पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. तरन्नुम शकील से आत्मीय संबंध था, जो उसे मार्गदर्शन देती थीं और उसके काम की सराहना करती थीं। आरोप है कि नए विभागाध्यक्ष को यह निकटता पसंद नहीं थी और उन्होंने तन्वी को उनसे दूरी बनाने के लिए कहा। तन्वी अपनी मां के साथ इंदिरेश अस्पताल के पास टीएचडीसी कॉलोनी में किराये पर रहती थी। पड़ोसियों के अनुसार, वह बेहद सरल, मिलनसार और मददगार स्वभाव की थी। वह अक्सर जरूरतमंदों की सहायता करती और अस्पताल के स्टाफ के लिए घर से अतिरिक्त खाना लेकर जाती थी।
स्थानीय लोगों ने बताया कि तन्वी की मां धार्मिक प्रवृत्ति की हैं और नियमित रूप से मंदिर जाती थीं। तन्वी भी आसपास के लोगों की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखती थी, जिससे वह सभी की प्रिय बन गई थी। इस घटना ने एक बार फिर मेडिकल छात्रों पर बढ़ते दबाव और संस्थागत वातावरण को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और सभी आरोपों की गहन पड़ताल की जा रही है।
