उत्तराखंड - हल्द्वानी से दून तक बनेंगे बिजली बैंक, 502 करोड़ की लागत से स्टोर होगी 250 मेगावाट-घंटे बिजली

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उत्तराखंड - हल्द्वानी से दून तक बनेंगे बिजली बैंक, 502 करोड़ की लागत से स्टोर होगी 250 मेगावाट-घंटे बिजली

देहरादून - उत्तराखंड में बिजली की उपलब्धता और पीक डिमांड के बीच संतुलन बनाने के लिए उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) बड़े पैमाने पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित करेगा। प्रदेश के विभिन्न 33/11 केवी सबस्टेशनों के आसपास स्थापित होने वाले इन सिस्टमों की कुल क्षमता 100 मेगावाट और स्टोरेज क्षमता 250 मेगावाट-घंटे होगी। परियोजना को तीन क्लस्टरों में बांटा गया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 502 करोड़ रुपये है।

कम मांग के समय चार्ज होगी बैटरी - 
योजना के तहत जब ग्रिड में बिजली की उपलब्धता अधिक होगी या मांग कम होगी, तब स्टोरेज सिस्टम की बैटरियों को चार्ज किया जाएगा। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने पर बैटरी में स्टोर बिजली को दोबारा नेटवर्क में भेजा जा सकेगा। इससे पीक डिमांड के दौरान ग्रिड को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

तीन क्लस्टरों में स्थापित होंगे सिस्टम - 
यूपीसीएल ने स्टोरेज परियोजना को तीन क्लस्टरों में विभाजित किया है। क्लस्टर-ए में 36 मेगावाट क्षमता और 90 मेगावाट-घंटे स्टोरेज, क्लस्टर-बी में 23 मेगावाट क्षमता और 57.5 मेगावाट-घंटे स्टोरेज, जबकि क्लस्टर-सी में 41 मेगावाट क्षमता और 102.5 मेगावाट-घंटे स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया जाएगा। कुल 100 मेगावाट की क्षमता पर बैटरी करीब 2.5 घंटे तक बिजली उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन की गई है।

हल्द्वानी समेत कई क्षेत्रों को मिलेगा लाभ - 
क्लस्टर-ए में रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और पिथौरागढ़ को शामिल किया गया है। क्लस्टर-बी के तहत देहरादून के ग्रामीण और शहरी क्षेत्र आएंगे। वहीं, क्लस्टर-सी में उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुड़की और टिहरी को शामिल किया गया है। इस तरह प्रदेश के 10 से अधिक क्षेत्रों में स्टोरेज सिस्टम स्थापित किए जाने की योजना है।

पीपीपी मोड में होगा संचालन - 
परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में स्थापित किया जाएगा। यूपीसीएल अपने खर्च से बैटरियां खरीदकर सिस्टम नहीं लगाएगा, बल्कि संबंधित कंपनी को सबस्टेशन की भूमि उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगा। स्टोरेज सिस्टम के माध्यम से बिजली की मांग बढ़ने के समय ग्रिड को सहारा देने और तत्काल बिजली खरीद की जरूरत को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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