हल्द्वानी - डीपीएस हल्द्वानी के वार्षिकोत्सव में सम्राट अशोक की ऐतिहासिक गाथा ने मोहा मन

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हल्द्वानी - डीपीएस हल्द्वानी के वार्षिकोत्सव में सम्राट अशोक की ऐतिहासिक गाथा ने मोहा मन

हल्द्वानी - दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), हल्द्वानी में शनिवार को वार्षिक उत्सव धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस वर्ष समारोह की थीम ‘सम्राट अशोक: चंड से धम्म तक—विजय से करुणा तक की एक यात्रा’ रही। विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नृत्य और संगीतमय नाटिका के माध्यम से सम्राट अशोक के जीवन और उनके ऐतिहासिक परिवर्तन को मंच पर जीवंत कर दिया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सतपाल सिंह बिष्ट ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद विद्यार्थियों ने संगीतमय नाटिका के माध्यम से सम्राट अशोक के जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रभावशाली मंचन किया। प्रस्तुति में अशोक के प्रारंभिक जीवन, साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा, विशाल सेना और कलिंग युद्ध के दृश्यों को आकर्षक ढंग से दर्शाया गया।

 

नाटिका का सबसे भावुक दृश्य कलिंग युद्ध के बाद का रहा, जब युद्ध में हुए नरसंहार और मानवीय पीड़ा से विचलित होकर सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन होता है। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय और नृत्य के माध्यम से अशोक के चंड स्वरूप से धम्म और करुणा के मार्ग पर आने की यात्रा को बेहद संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया। मंच पर साँची स्तूप, बोधि वृक्ष, अशोक स्तंभ और धर्मचक्र की झलकियों ने दर्शकों को भारतीय इतिहास और संस्कृति से रूबरू कराया।

मुख्य अतिथि सतपाल सिंह बिष्ट ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, अनुशासन और शानदार मंचन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समारोह में आकर्षक मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा, मधुर संगीत और शानदार प्रकाश संयोजन ने कार्यक्रम की भव्यता बढ़ाई। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को अभिभावकों और अतिथियों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी अतिथियों और अभिभावकों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही विद्यार्थियों को सम्राट अशोक के जीवन से प्रेरणा लेते हुए शांति, करुणा, सहिष्णुता और मानव सेवा के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया गया।

वार्षिकोत्सव ने यह संदेश दिया कि वास्तविक महानता केवल विजय प्राप्त करने में नहीं, बल्कि करुणा, शांति और मानवता की सेवा में निहित है।

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