हल्द्वानी - एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव में खर्च की सीमा पर सवाल, 50 हजार की लिमिट, करीब इतना करोड़ खर्च का अनुमान

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हल्द्वानी - एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव में खर्च की सीमा पर सवाल, 50 हजार की लिमिट, करीब इतना करोड़ खर्च का अनुमान

हल्द्वानी - एमबीपीजी कॉलेज में हुए छात्रसंघ चुनाव में लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत तय चुनावी खर्च की सीमा पर सवाल खड़े हो गए हैं। कॉलेज में 11 पदों के लिए 72 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। चुनाव के दौरान हुए खर्च का एक अनुमान करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जबकि प्रत्याशियों ने लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार अधिकतम 50 हजार रुपये खर्च करने का शपथ पत्र दाखिल किया था।

कॉलेज में करीब 12,800 छात्र-छात्राएं पंजीकृत बताए गए हैं, लेकिन चुनाव में महज 4,063 छात्र-छात्राओं ने मतदान किया। यानी करीब 32 प्रतिशत मतदान हुआ और 68 प्रतिशत से अधिक छात्र-छात्राएं मतदान से दूर रहे। डेढ़ करोड़ रुपये के अनुमानित कुल खर्च को मतदान करने वाले छात्रों की संख्या से जोड़ें तो प्रति वोट करीब 3,700 रुपये खर्च होने का अनुमान सामने आता है। हालांकि, यह खर्च का अनुमान है, आधिकारिक हिसाब नहीं।

फ्रेशर पार्टी और म्यूजिकल फेस्ट पर लाखों खर्च - 
चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की ओर से मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आयोजन किए गए। प्रमुख पदों के प्रत्याशियों की ओर से फ्रेशर पार्टियों और म्यूजिकल फेस्ट का आयोजन कराया गया। इनमें प्रदेश के चर्चित कलाकारों को बुलाने पर करीब 60 से 65 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके अलावा पोस्टर, बैनर, होर्डिंग और पंपलेट पर करीब पांच से सात लाख रुपये खर्च किए जाने की बात सामने आई है। समर्थकों को फिल्म दिखाने और बसों व कारों से धार्मिक व पर्यटन स्थलों की यात्राएं कराने पर भी करीब आठ से 10 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

खाना, वाहन और चुनाव कार्यालय का भी खर्च - 
चुनाव प्रचार के दौरान रोजाना भोजन-पानी, रेस्तरां में बैठकें, पेट्रोल-डीजल, वाहनों, किराये के चुनाव कार्यालय और अन्य प्रचार सामग्री पर भी बड़ी रकम खर्च होने की बात कही जा रही है। मतदान के दिन गौलापार, गूलरभोज, बिंदुखत्ता और ओखलकांडा समेत दूरदराज क्षेत्रों से छात्र-छात्राओं को लाने के लिए भी वाहनों का इस्तेमाल किया गया। इन सभी मदों को मिलाकर 60 से 70 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा समर्थकों के बीच पैसे बांटने के आरोप भी सामने आए हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

प्रत्याशियों के साथ समर्थकों के खर्च पर भी सवाल - 
छात्रसंघ चुनाव में सिर्फ प्रत्याशियों की ओर से ही खर्च किए जाने की बात नहीं कही जाती। कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार शहर के आर्थिक रूप से सक्षम लोग और राजनीतिक दलों से जुड़े कुछ लोग भी अपने समर्थित प्रत्याशियों के प्रचार में आर्थिक सहयोग करते हैं। ऐसे में वास्तविक चुनावी खर्च का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कम मतदान ने बढ़ाए चुनाव की प्रासंगिकता पर सवाल - 
एमबीपीजी कॉलेज में कम मतदान ने छात्रसंघ चुनाव की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। कॉलेज की एक छात्रा के अनुसार चुनाव के दौरान माहौल को लेकर कई छात्र-छात्राएं असहज महसूस करते हैं और इसी कारण वे मतदान से दूरी बनाते हैं। पिछले वर्ष भी कॉलेज में करीब 25 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने ही मतदान किया था। लगातार कम मतदान के बीच छात्रसंघ चुनाव में होने वाले खर्च, बाहरी लोगों की आवाजाही और चुनाव के दौरान होने वाले विवादों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

कॉलेज प्रशासन ने कही यह बात - 
एमबीपीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. एनएस बनकोटी के अनुसार, लिंगदोह समिति की सिफारिशों के तहत प्रत्याशियों ने 50 हजार रुपये तक खर्च करने का शपथ पत्र दाखिल किया था। अत्यधिक खर्च के सवाल पर प्रत्याशियों की ओर से अक्सर यह कहा जाता है कि उनके समर्थक खर्च करते हैं और यह राशि उनके व्यक्तिगत खर्च में शामिल नहीं होती।

 

 

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