नैनीताल - अंग्रेजों के रेवेन्यू मैन्युअल को लागू कर डीएम रयाल ने बना दिया एक नया रिकॉर्ड, देखिये कैसे चढ़ रही हैं आसानी से भूमि विरासतन
नैनीताल - 20-20 साल से पुश्तैनी ज़मीनों पर मलिकानों हक के लिए दफ़्तरो के चक्कर काटने वाले ग्रामीणों को हाथ के हाथ जमीनों पर मालिकाना हक दिया जा रहा हैं। अंग्रेजों के जमाने की परम्परा को नैनीताल ज़िलें में फिर से लागू कर दिया गया हैं.. यह पहली बार हैं ज़ब जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने रेवेन्यू मैन्युअल 1901 के जरिये पटवारियों को चौपाल लगाकर एक हज़ार से ज्यादा मामलों में ग्रामीणों की जमीन विरासतन दर्ज करा डाली हैं..
अंग्रेजों के ज़माने में ऐसे विरासतन दर्ज का हैं नियम -
राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार और तहसील की लाल फीताशाही को खत्म करने लिए जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने रेवेन्यू मैन्युअल के जरिये स्थानीय लोगों को उनका हाथ के हाथ भूमि अधिकार दिये जाने की शुरुआत की हैं। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों के जमाने में सन 1901 रेवेन्यू मैन्युअल बना हुआ हैं जिसमें गाँव में चौपाल लगाकर लेखपाल कानूनगो पुश्तैनी जमीनों पर वारिसानो को उनका हक दिया जाता था, लेकिन वह काफी समय से नहीं हुआ था। स्थानीय लोगों की कई फ़ाइल तहसील में पड़ी हुई हैं इसी को देखते हुए उन्होंने फैसला लिया की भूमि खतौनी में विरासतन चढ़ाने के लिए लोगों को इंतिजार नहीं करना पड़ेगा।
इतने मामले महीने भर में निपट गए -
इस विशेष अभियान में विभिन्न तहसीलों में कुल 1120 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
तहसीलों में निस्तारण का आंकड़ा इस प्रकार है—
हल्द्वानी: 240,नैनीताल: 219,धारी: 131,श्री कैंची धाम: 92 कालाढूंगी: 167,बेतालघाट: 90
खनस्यू: 32,रामनगर: 106,लालकुआं: 43
रेवेन्यू मैन्युअल 1901 में साफ लिखा हैं मुखिया की मृत्यु उपरांत उनकी सम्पति को वारिसानों में दर्ज कर दिया जाए उन्होंने इसी नियम को लागू कर दिया हैं जिसमें पटवारी गाँव में चौपाल लगाकर संभरंत लोगों की मौजूदगी में ज़मीन के वारिसानों के नाम खतौनी में दर्ज कर रहें हैं।
