हल्द्वानी - नैनीताल हाईकोर्ट ने SWARNIKA ज्वेलर्स नाम के उपयोग पर लगाई रोक, ‘SUNAREKA ज्वेलर्स ट्रेडमार्क मामले में अपीलकर्ता को अंतरिम राहत
नैनीताल - उत्तराखंड हाईकोर्ट, नैनीताल ने आभूषण कारोबार से जुड़े एक ट्रेडमार्क विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए “SWARNIKA” नाम/लेबल के उपयोग पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा कि “SUNAREKA” और “SWARNIKA” नामों के बीच प्रथम दृष्टया ऐसी समानता है जिससे सामान्य उपभोक्ता के भ्रमित होने की संभावना बनती है।
माननीय न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की एकलपीठ ने दीपांशु बंसल बनाम पूनम भट्ट मामले में अपील स्वीकार करते हुए प्रथम अपर जिला न्यायाधीश, उधम सिंह नगर का 18 जुलाई 2026 का आदेश निरस्त कर दिया। निचली अदालत ने इससे पहले दीपांशु बंसल की अस्थायी निषेधाज्ञा की मांग खारिज कर दी थी।
अपीलकर्ता दीपांशु बंसल का कहना था कि वह सोना, चांदी, हीरा, प्लैटिनम और अन्य आभूषणों के व्यापार से जुड़े हैं तथा उनका “SUNAREKA” ट्रेडमार्क 28 जुलाई 2023 को पंजीकृत हुआ था। न्यायालय के समक्ष यह भी रखा गया कि ट्रेडमार्क पंजीकरण के लिए आवेदन 9 सितंबर 2022 को किया गया था, जिसका कानूनी प्रभाव आवेदन की तिथि से माना जाता है।
दूसरी ओर, प्रतिवादी पूनम भट्ट ने “SWARNIKA Gems and Jewels” नाम को अलग बताते हुए कहा कि यह “स्वर्ण” शब्द से प्रेरित है और उसका ट्रेडमार्क पंजीकरण आवेदन भी लंबित है। प्रतिवादी का तर्क था कि दोनों नामों की वर्तनी, उच्चारण, प्रस्तुति और लोगो अलग-अलग हैं, इसलिए उपभोक्ता के भ्रमित होने की आशंका नहीं है।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणी-
हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रेडमार्क की तुलना करते समय उसे टुकड़ों में बांटकर नहीं देखा जा सकता। न्यायालय ने “एंटी-डिसेक्शन नियम” का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी ट्रेडमार्क का आकलन उसके समग्र प्रभाव के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि सामान्य खरीदार चिह्नों के सूक्ष्म अंतर याद नहीं रखता, बल्कि उसके मन में बनी सामान्य छवि के आधार पर खरीदारी करता है।
न्यायालय ने यह भी माना कि ग्राहक को प्रायः दोनों ब्रांड नाम साथ रखकर तुलना करने का अवसर नहीं मिलता। ऐसे में औसत बुद्धि और अपूर्ण स्मृति वाला खरीदार “SUNAREKA” और “SWARNIKA” के बीच समग्र समानता के कारण भ्रमित हो सकता है।
आदेश में यह भी दर्ज है कि दोनों पक्षों की दुकानें एक ही सड़क पर स्थित हैं और उनके बीच की दूरी 500 मीटर से कम है। न्यायालय ने पाया कि अपीलकर्ता सितंबर 2022 से अपने ट्रेडमार्क के पंजीकरण की प्रक्रिया में था, जबकि प्रतिवादी ने सोने के आभूषणों के व्यवसाय में जून 2023 के आसपास प्रवेश किया।
हाईकोर्ट ने प्रतिवादी को स्वयं या अपने निदेशकों, स्वामियों, साझेदारों, एजेंटों, प्रतिनिधियों, वितरकों, स्टॉकिस्टों, डीलरों और खुदरा विक्रेताओं के माध्यम से “SWARNIKA” अथवा “SUNAREKA” से भ्रामक रूप से मिलते-जुलते किसी भी ट्रेडमार्क/लेबल के तहत निर्माण, बिक्री, उपयोग, प्रदर्शन, विज्ञापन, आयात-निर्यात अथवा अन्य प्रकार का कारोबार करने से रोक दिया है।
यह अंतरिम रोक सिविल वाद संख्या 01/2024, दीपांशु बंसल बनाम पूनम भट्ट, के जिला न्यायाधीश, रुद्रपुर, जिला उधम सिंह नगर के समक्ष अंतिम निस्तारण तक प्रभावी रहेगी। आदेश दिनांक 7 अक्टूबर 2026 को पारित किया गया।


