हल्द्वानी - नाम ही नहीं काम भी दया वाला, सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए शैमफोर्ड के चेयरमैन ने खोल दिए अपने स्कूल के दरवाजे

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हल्द्वानी - नाम ही नहीं काम भी दया वाला, सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए शैमफोर्ड के चेयरमैन ने खोल दिए अपने स्कूल के दरवाजे

हल्द्वानी - नाम दया सागर बिष्ट और काम भी दया वाला, जी हाँ सरकारी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों के चेहरों में शैमफोर्ड स्कूल के चेयरमैन मुस्कान ले आये, दरअसल जयपुर बीसा राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन में जलभराव और जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण की जरूरत के चलते जब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने लगी तो शैमफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हल्द्वानी के चेयरमैन एडवोकेट दया सागर बिष्ट ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया। उन्होंने सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए अपने विद्यालय के दो कक्ष निःशुल्क उपलब्ध करा दिए।

जयपुर बीसा राजकीय प्राथमिक विद्यालय के भवन के पुनर्निर्माण तक बच्चे शैमफोर्ड विद्यालय में इन कक्षों में पढ़ाई करेंगे। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे विद्यालय भवन तैयार होने तक उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रह सके। 

शैमफोर्ड प्रबंधन की ओर से बच्चों को नियमित कक्षाओं के साथ विद्यालय की आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं से भी परिचित कराया जा रहा है। इसी क्रम में विद्यार्थियों ने विद्यालय के पुस्तकालय, गणित प्रयोगशाला और कंप्यूटर प्रयोगशाला का भ्रमण किया। आधुनिक सुविधाओं को देखकर बच्चों में खासा उत्साह नजर आया। इस दौरान चेयरमैन दया सागर बिष्ट ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें पुरस्कृत भी किया।

विधि के साथ शिक्षा जगत में भी सक्रिय हैं दया सागर बिष्ट - 
एडवोकेट दया सागर बिष्ट लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और जरूरतमंदों की सहायता से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है और सक्षम लोगों को जरूरत के समय समाज के साथ खड़ा होना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने जयपुर बीसा के विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने विद्यालय के कक्ष उपलब्ध कराने की पहल की।

इस पहल को सफल बनाने में निदेशक राजेश बिष्ट, चेयरपर्सन ऋचा बिष्ट, निदेशक शैक्षणिक अंजू भट्ट, प्रधानाचार्या संतोष पांडेय सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर स्टाफ का सहयोग रहा। शैमफोर्ड प्रबंधन की यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सहयोग की मिसाल पेश करती है।

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