हल्द्वानी - डॉ. कविता पांडेय साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से हुईं सम्मानित, कुमाऊं की साहित्यिक परंपरा को किया है समृद्ध

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हल्द्वानी - डॉ. कविता पांडेय साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से हुईं सम्मानित, कुमाऊं की साहित्यिक परंपरा को किया है समृद्ध

 

हल्द्वानी - कुमाऊं की साहित्यिक परंपरा को समृद्ध करने वाली साहित्यकार, शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिक प्रोफेसर (डॉ.) कविता पांडेय की नवीनतम कहानी-संग्रह कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ का लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर उन्हें प्रतिष्ठित ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

 

डॉ. कविता पांडेय की कृति ‘अदम्य-असीम की ओर’ स्त्री-मन की संवेदनाओं, जीवन-संघर्षों, आत्मसम्मान और स्वतंत्र अस्तित्व की आकांक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है। पुस्तक का शीर्षक स्त्री की उस आंतरिक शक्ति और असीम संभावनाओं का प्रतीक है, जो सामाजिक रूढ़ियों, असमानताओं और विभिन्न बंधनों के बावजूद उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।

 

लेखिका की रचनात्मक दृष्टि समाज के उन पहलुओं को सामने लाने का प्रयास करती है, जिनमें स्त्रियों की अनकही पीड़ाएं, मौन संघर्ष और अपने जीवन के निर्णय स्वयं लेने की इच्छा शामिल हैं। उनकी साहित्यिक संवेदना स्त्री को केवल त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति के रूप में देखने के बजाय एक स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में समझने पर बल देती है। इस दृष्टि से यह कहानी-संग्रह स्त्री-अस्मिता, समानता और मानवीय गरिमा जैसे समकालीन सामाजिक प्रश्नों से जुड़ता है।

 

डॉ. कविता पांडेय का व्यक्तित्व साहित्य और विज्ञान के समन्वय का भी उदाहरण है। वह कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में भौतिक विज्ञान विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता विज्ञान संकाय तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुकी हैं। विज्ञान के क्षेत्र में उनके अनुभव और साहित्य के प्रति उनकी संवेदनशील दृष्टि उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करती है।

उत्तराखंड के कुमाऊं अंचल की सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक विरासत से जुड़ी डॉ. पांडेय की लेखनी स्थानीय जीवनानुभवों को व्यापक सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का प्रयास करती है। कुमाऊं की धरती ने हिंदी साहित्य को शिवानी सहित अनेक महत्वपूर्ण महिला साहित्यकार दिए हैं। इसी सृजनशील परंपरा के संदर्भ में डॉ. कविता पांडेय की साहित्यिक यात्रा भी उल्लेखनीय है। भीमताल से उनका संबंध उनकी क्षेत्रीय पहचान को और विशिष्ट बनाता है।

साहित्य की सार्थकता केवल पुरस्कारों और सम्मानों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह पाठकों को सोचने, सामाजिक रूढ़ियों पर प्रश्न उठाने और दूसरों के अनुभवों के प्रति संवेदनशील बनने के लिए प्रेरित करती है। इस दृष्टि से ‘अदम्य-असीम की ओर’ का विषय समकालीन समाज में महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता, समान अवसर और स्वतंत्र निर्णय के अधिकार जैसे मुद्दों से जुड़ता है।

डॉ. कविता पांडेय को ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान’ मिलने और उनकी नई कृति के लोकार्पण से उनके साहित्यिक योगदान को नई पहचान मिली है। उनकी इस उपलब्धि को साहित्य और शिक्षा जगत के लिए गौरवपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

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