उत्तराखंड - पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन, प्रदेश भर में शोक की लहर, राजनीतिक जगत ने दी श्रद्धांजलि
देहरादून - उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर से पूरे उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। भुवन चंद्र खंडूरी उत्तराखंड की राजनीति का एक बड़ा और सम्मानित चेहरा रहे। उनकी पहचान सादगी, ईमानदारी और सख्त प्रशासनिक शैली के लिए होती थी। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश में कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया और सुशासन की मिसाल पेश की।
वह वर्तमान उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतू भूषण खंडूरी के पिता थे। उनके निधन पर विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय समेत कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इसे उत्तराखंड राजनीति की अपूरणीय क्षति बताया।
अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी सहयोगी थे खंडूरी -
अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी माने जाने वाले भुवन चंद्र खंडूरी सेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में आए थे। 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और जल्द ही भाजपा के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए। पहली बार लोकसभा पहुंचने के कुछ ही समय बाद उन्हें पार्टी का मुख्य सचेतक बनाया गया। हालांकि 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया।
सड़क विकास में निभाई अहम भूमिका -
केंद्रीय मंत्री रहते हुए देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों और सड़क नेटवर्क के विस्तार में उनकी बड़ी भूमिका रही। इसी दौर में देश में हाईवे निर्माण को नई गति मिली, जिसके लिए आज भी उनकी प्रशंसा की जाती है। कहा जाता है कि अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी कार्यशैली पर पूरा भरोसा था और उन्हें काम करने की पूरी स्वतंत्रता मिली हुई थी। भुवन चंद्र खंडूरी का निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
