नैनीताल- पीएचडी उपाधि प्राप्त कर डॉ. चंद्र प्रकाश तिवारी ने बढ़ाया क्षेत्र का मान, औषधीय गुणों पर शोध से खुले नई संभावनाओं के द्वार

 | 
नैनीताल- पीएचडी उपाधि प्राप्त कर डॉ. चंद्र प्रकाश तिवारी ने बढ़ाया क्षेत्र का मान, औषधीय गुणों पर शोध से खुले नई संभावनाओं के द्वार

नैनीताल - कुमाऊं क्षेत्र के होनहार शोधार्थी डॉ. चंद्र प्रकाश तिवारी ने अपना अंतिम पीएचडी वाइवा सफलतापूर्वक पूर्ण कर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (Ph.D.) की उपाधि प्राप्त कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि से परिवार, गुरुजनों तथा पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। डॉ. तिवारी के पिता वेद प्रकाश तिवारी, जो इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं, तथा माता रेखा तिवारी गृहिणी हैं। उनकी सफलता में माता-पिता के आशीर्वाद, संस्कार और निरंतर प्रेरणा का विशेष योगदान रहा। साथ ही उनकी पत्नी श्रीमती बबीता तिवारी ने कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाते हुए हर कदम पर सहयोग प्रदान किया।


डॉ. तिवारी ने अपना शोधकार्य “कुमाऊं हिमालय में पाए जाने वाले धनिया (Coriandrum sativum L.) के विभिन्न जीनोटाइप्स में आणविक, रासायनिक एवं जैव-सक्रियता का अध्ययन” विषय पर कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में पूर्ण किया। यह शोध उन्होंने अपने मार्गदर्शक प्रो. कमल के. पांडे (पूर्व निदेशक, उच्च शिक्षा उत्तराखंड) तथा सह-मार्गदर्शक प्रो. वीना पांडे (विभागाध्यक्ष, बायोटेक्नोलॉजी विभाग) के निर्देशन में संपन्न किया।


वाइवा के दौरान डॉ. तिवारी ने अपनी प्रस्तुति में शोध के महत्वपूर्ण निष्कर्ष साझा किए। अध्ययन के अंतर्गत कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और चंपावत जिलों से एकत्रित धनिया के विभिन्न जीनोटाइप्स का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसमें RAPD मार्कर आधारित आणविक अध्ययन, GC-MS रासायनिक विश्लेषण तथा एंटी-बैक्टीरियल एवं एंटी-फंगल जैव-सक्रियता परीक्षण शामिल रहे।

 


शोध के प्रमुख निष्कर्षों में पाया गया कि धनिया के एसेंशियल ऑयल में लिनालूल (Linalool) 70 प्रतिशत से अधिक मात्रा में प्रमुख यौगिक के रूप में उपस्थित है। यह यौगिक अपनी रोगाणुरोधी क्षमता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त जेरानिल एसीटेट, अल्फा-पिनीन, कपूर और ओलिक एसिड जैसे यौगिक भी पाए गए, जो इसके औषधीय गुणों को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।


रासायनिक विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 1500 से 1900 मीटर ऊंचाई पर पाए जाने वाले जीनोटाइप्स में रासायनिक विविधता अधिक है। विशेष रूप से सैंपल C में 93 विभिन्न यौगिक पाए गए, जिससे इसे जैव-सक्रियता और औषधीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया।


जैव-सक्रियता अध्ययन में धनिया का तेल Klebsiella pneumoniae जैसे ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया के विरुद्ध अत्यधिक प्रभावी पाया गया, जबकि एंटी-फंगल परीक्षण में Candida tropicalis के खिलाफ उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त हुए। यह शोध प्राकृतिक औषधियों, खाद्य संरक्षण तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स के विकास के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।


अपनी सफलता पर डॉ. तिवारी ने अपने मार्गदर्शकों, परिवार और शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि क्षेत्र और विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। क्षेत्र के शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

WhatsApp Group Join Now