हल्द्वानी- शुद्धिकरण विवाद पर कांग्रेस का मौन सत्याग्रह, बारिश में भी डटे नेता-कार्यकर्ता
हल्द्वानी - कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आठ अगस्त को रामलीला मैदान में हुई सभा के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। रविवार को कांग्रेस ने रामलीला मैदान में मौन सत्याग्रह कर विरोध जताया। बारिश के बावजूद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता धरना स्थल पर डटे रहे और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच व कानूनी कार्रवाई की मांग की।
मौन सत्याग्रह में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, हल्द्वानी विधायक सुमित हृदयेश, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, नारायण पाल, रंजीत रावत, पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, पूर्व सांसद महेंद्र पाल, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव संजीव आर्य और कांग्रेस नेता ललित जोशी समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान का कथित शुद्धिकरण किया जाना सामाजिक समानता और दलित सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस ने मौन सत्याग्रह के माध्यम से स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है।
इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस वार्ता के दौरान हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए कथित शुद्धिकरण को दलित सम्मान से जोड़कर कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस की ओर से मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में कांग्रेस के कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर धर्म विरोधी नारे लगाए गए और कार्यक्रम के बाद गंदगी हुई थी। मुख्यमंत्री के अनुसार कुछ स्वयंसेवी लोगों ने धार्मिक स्थल की मर्यादा के चलते शुद्धिकरण किया, जिनका भाजपा से कोई लेना-देना नहीं है।
शुद्धिकरण विवाद को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच रामलीला मैदान एक बार फिर सियासी केंद्र बन गया है। कांग्रेस के मौन सत्याग्रह के बाद इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार हैं।



