कुमाऊं में सात माह में 1051 महिलाएं और बच्चियां लापता, पुलिस जांच में महिलाओं के लापता होने के पीछे सामने आए यह कारण

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कुमाऊं में सात माह में 1051 महिलाएं और बच्चियां लापता, पुलिस जांच में महिलाओं के लापता होने के पीछे सामने आए यह कारण

हल्द्वानी - कुमाऊं मंडल में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के मामले पुलिस के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। पिछले सात माह में मंडल के विभिन्न जिलों से कुल 1,051 महिलाएं और बच्चियां लापता हुईं, जिन्हें पुलिस ने तलाश कर सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक लापता लोगों में करीब 71 प्रतिशत महिलाएं और बच्चियां थीं।

पुलिस के अनुसार बरामद 1,051 लोगों में 532 महिलाएं, 210 लड़कियां, 299 पुरुष और 220 बच्चे शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियां भी शामिल हैं, जो घर से निकलने के बाद दूसरे शहरों में मिलीं। पुलिस ने महिलाओं और बच्चियों की तलाश के लिए उत्तराखंड के बाहर भी कई राज्यों में दबिश दी।

घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवाद बड़ी वजह - 
पुलिस जांच में महिलाओं के लापता होने के पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें घरेलू हिंसा, प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न, आर्थिक परेशानी, बेरोजगारी और परिवार की डांट-फटकार प्रमुख हैं। कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण भी महिलाएं और बच्चियां घर से निकल गईं और बाद में रास्ता भटक गईं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ महिलाओं को बरामद कर घर पहुंचाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। लापता होने के मूल कारणों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

नेपाल सीमा से सटे जिलों में मानव तस्करी का खतरा - 
कुमाऊं के चंपावत, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर जिले नेपाल सीमा से लगे हैं। ऐसे में महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के मामलों में मानव तस्करी की आशंका भी पुलिस के लिए अहम चुनौती है। पुलिस इन मामलों में दूसरे राज्यों तक संपर्क कर तलाश अभियान चलाती है।

पुलिस के अनुसार महिला अपहरण के 96 प्रतिशत मामलों का खुलासा किया गया है। वहीं दहेज हत्या के 93 प्रतिशत मामलों का भी खुलासा किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

शिकायत प्रकोष्ठ में आईं 1048 शिकायतें - 
आईजी शिकायत प्रकोष्ठ में सात माह के दौरान 1,048 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 905 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों को लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।

कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। महिला या बच्ची के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस टीम गठित कर तलाश शुरू की जाती है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं पुलिस ने बड़ी संख्या में लापता महिलाओं, बच्चियों और अन्य लोगों को तलाश कर सकुशल उनके परिवारों तक पहुंचाया है। बेहतर पुलिसिंग के लिए सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

आंकड़े बता रहे गंभीर तस्वीर - 
कुमाऊं में लापता महिलाओं और बच्चियों की बड़ी संख्या पहाड़ी समाज के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा करती है। घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव जैसे कारणों पर प्रभावी ढंग से काम किए बिना ऐसे मामलों पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल होगा। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के बावजूद महिलाओं और बच्चियों के लगातार लापता होने के मामलों को रोकने के लिए परिवार और समाज के स्तर पर भी ठोस प्रयास जरूरी हैं।

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