Kumaon News - यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलने से पहले ही हुए धड़ाम, आसपास अफरा-तफरी का माहौल 

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Kumaon News - यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलने से पहले ही हुए धड़ाम, आसपास अफरा-तफरी का माहौल 

Kumaon News - उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में विजयादशमी के पावन पर्व पर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब गांधी पार्क में लगाए गए रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशालकाय पुतले तेज हवा और बारिश की वजह से दहन से पहले ही धराशायी हो गए। हादसे में पुतलों को काफी नुकसान पहुंचा, लेकिन राहत की बात रही कि कोई जनहानि नहीं हुई।

पुतलों के गिरने से आयोजन पर मंडराया संकट - 
हर वर्ष की तरह इस बार भी रुद्रपुर के गांधी पार्क में भव्य दशहरा समारोह की तैयारियां की गई थीं। रामपुर से आई विशेषज्ञ टीम ने 65 फीट ऊंचा रावण और 60-60 फीट के कुंभकरण व मेघनाद के पुतले तैयार किए थे। तीन महीने की मेहनत और करीब डेढ़ लाख रुपये की लागत से बने इन पुतलों को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह था। लेकिन अचानक आए तेज हवा के झोंकों और हल्की बारिश ने आयोजकों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

हादसे से बाल-बाल बचे लोग - 
तेज हवा इतनी शक्तिशाली थी कि पुतले लोगों की आंखों के सामने ही भरभराकर गिर पड़े। किसी पुतले का सिर टूटा, किसी के हाथ-पैर क्षतिग्रस्त हो गए। सौभाग्य से घटनास्थल पर मौजूद कोई व्यक्ति इसकी चपेट में नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी में जुटे आयोजक - 
घटना के बाद आयोजन समिति सक्रिय हो गई है और क्षतिग्रस्त पुतलों की मरम्मत या वैकल्पिक पुतलों की व्यवस्था की योजना बनाई जा रही है। आयोजन समिति के सदस्य हरीश अरोड़ा ने जानकारी देते हुए कहा, "अचानक मौसम में बदलाव के कारण पुतले थोड़े बहुत क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन दर्शकों को निराश नहीं किया जाएगा। समिति की बैठक चल रही है। तय समय पर रावण मरेगा और पुतला भी दहन होगा।"

आस्था और परंपरा के प्रतीक पर्व में बाधा - 
दशहरा न केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का पर्व भी है। रुद्रपुर में इस आयोजन को देखने हर साल हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। ऐसे में आयोजक अब हरसंभव प्रयास कर रहे हैं कि शाम को होने वाला पुतला दहन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।

रुद्रपुर में मौसम की मार ने दशहरा की खुशियों को थोड़ी देर के लिए भले ही फीका कर दिया हो, लेकिन आयोजन समिति की तत्परता और जनता की आस्था इस पर्व को सफल बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उम्मीद है कि शाम होते-होते रावण फिर से खड़ा होगा और परंपरा के अनुसार उसका दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा।

 

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