हल्द्वानी - पटवारी 600 तहसीलदार 1200 और SDM को जाते हैं इतने हजार, तहसील में अरायजनवीस के आरोपों के बाद DM ने बिठा दी जांच 
 

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हल्द्वानी - पटवारी 600 तहसीलदार 1200 और SDM को जाते हैं इतने हजार, तहसील में अरायजनवीस के आरोपों के बाद DM ने बिठा दी जांच 

हल्द्वानी - फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच के बीच हल्द्वानी तहसील के एक अरायजनवीस (दस्तावेज़ लेखक) का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। वायरल वीडियो में अरायजनवीस योगेश ने तहसील के कर्मचारियों—पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम—पर सुविधा शुल्क के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि तहसील में कार्यों के बदले अलग-अलग पदनामों के नाम पर राशि ली जाती है।

काउंटरों पर उत्पीड़न का आरोप - 
वीडियो में योगेश का कहना है कि प्रमाणपत्रों की जांच के नाम पर अधिकारी लाइसेंसधारकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं। उनके अनुसार अधिकारियों द्वारा बिजली कनेक्शन, शटरबंद काउंटर, लोहे के जाल, उपकरणों आदि पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि ये सभी व्यवस्थाएँ प्रशासनिक अनुमति के बाद ही की गई थीं।

योगेश ने वीडियो में यह भी दावा किया कि—
पटवारी हर फाइल पर 600 रुपये,
तहसीलदार के नाम पर 1200 रुपये,
दाखिलखारिज के 3000 रुपये,
और 143 की फाइलों में एसडीएम के नाम पर 10,000 रुपये लिए जाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन उन स्थानों पर जांच नहीं कर रहा, जहाँ बड़ी अनियमितताएँ हैं, बल्कि केवल लाइसेंसधारक दस्तावेज़ लेखकों को दबाव में लिया जा रहा है। योगेश वीडियो में कहते हैं कि जिन बिजली कनेक्शनों या काउंटरों की अब जांच की जा रही है, वे पूर्व में मानकों के अनुसार ही बने थे। उन्होंने उस समय के अधिकारियों के नाम भी लिए, जिनमें तत्कालीन कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश, डीएम दीपक रावत और तहसीलदार मोहन सिंह बिष्ट शामिल बताए गए।

प्रशासन ने दी प्रतिक्रिया, जांच अधिकारी नियुक्त
वायरल वीडियो के बाद जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) शैलेंद्र सिंह नेगी को जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया गया है। जांच अनेक बिंदुओं पर की जाएगी और 15 दिसंबर तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

बड़े स्तर पर लगे रिश्वत और अनियमितता के आरोप राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहे हैं। वायरल वीडियो ने तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालयों की व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल पैदा कर दिए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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