हल्द्वानी - भाजपा में दावेदारों की भरमार, हल्द्वानी, कालाढूंगी और लालकुआं सीट पर यह नेता लड़ना चाहते हैं विधानसभा चुनाव 

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हल्द्वानी - भाजपा में दावेदारों की भरमार, हल्द्वानी, कालाढूंगी और लालकुआं सीट पर यह नेता लड़ना चाहते हैं विधानसभा चुनाव 

 

हल्द्वानी - उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी संगठन की ओर से संभावित प्रत्याशियों को लेकर रायशुमारी का दौर शुरू हो गया है। इसी क्रम में प्रदेश कोर कमेटी के सदस्य एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने मंगलवार को हल्द्वानी में कुमाऊं संभाग कार्यालय पहुंचकर हल्द्वानी, कालाढूंगी और लालकुआं विधानसभा सीटों के लिए दावेदारों से बातचीत की। इससे पहले भीमताल और नैनीताल विधानसभा सीटों पर रायशुमारी की जा चुकी है।

हल्द्वानी विधानसभा सीट पर भाजपा के भीतर दावेदारों की लंबी सूची सामने आई है। यहां पूर्व मेयर जोगेंद्र पाल रौतेला, दर्जा राज्य मंत्री रेनू अधिकारी, शंकर कोरंगा, मोहन पाठक, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट, प्रदेश सह मीडिया प्रभारी भुवन जोशी, पूर्व ब्लॉक प्रमुख शान्ति भट्ट सहित निश्चल पांडे ने अपनी दावेदारी पेश की है।

वहीं कालाढूंगी विधानसभा सीट से पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक बंशीधर भगत के पुत्र विकास भगत, मेयर गजराज सिंह बिष्ट, दर्जा राज्य मंत्री सुरेश भट्ट, जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष आनंद सिंह दरमवाल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता सुरेश तिवारी समेत कई नेताओं के नाम दावेदारों के रूप में सामने आए हैं।
लालकुआं विधानसभा सीट पर भी भाजपा के भीतर टिकट के लिए दावेदारी देखने को मिली। यहां भाजपा नेता दीपेंद्र कोश्यारी और मुकेश बेलवाल समेत अन्य नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है। खास बात यह रही कि रायशुमारी के दौरान कालाढूंगी और लालकुआं के मौजूदा विधायक मौजूद नहीं रहे। ऐसे में इन दोनों सीटों पर पार्टी के भीतर चल रही दावेदारी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

भाजपा कोर कमेटी के सदस्य मदन कौशिक ने बताया कि संगठन की ओर से विधानसभा सीटों को लेकर रायशुमारी की जा रही है। इस दौरान जनता की राय जानने के साथ ही संबंधित सीट पर पार्टी की जीत की संभावनाओं और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा की जा रही है। हालांकि, कौशिक ने इस बैठक को सीधे तौर पर टिकट के दावेदारों की बैठक मानने से इनकार किया, लेकिन बैठक में जिस तरह कई नेताओं ने अपनी दावेदारी और चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की, उससे साफ है कि रायशुमारी के बहाने टिकट के दावेदारों ने भी अपनी बात प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश की।

फिलहाल तीनों विधानसभा सीटों पर दावेदारों की लंबी फेहरिस्त ने भाजपा के भीतर टिकट को लेकर हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजरें रायशुमारी के बाद प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी हैं।

 

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