उत्तराखंड - डूबने के कगार पर उत्तराखंड का यह बैंक, खतरे में खाताधारकों के करोड़ों रुपये, आरबीआई ने लगाई रोक 

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उत्तराखंड - डूबने के कगार पर उत्तराखंड का यह बैंक, खतरे में खाताधारकों के करोड़ों रुपये, आरबीआई ने लगाई रोक 

देहरादून - वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने बैंक की स्थिति को गंभीर संकट में डाल दिया है। शुरुआती जांच में यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि बैंक का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। बैंक लगातार घाटे में था, लेकिन उसे कागजों में मुनाफे में दर्शाया जाता रहा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अर्बन कोऑपरेटिव बैंक देहरादून पर छह माह की रोक लगा दी है। इस दौरान बैंक किसी भी प्रकार के नए लेनदेन या भुगतान पर प्रतिबंधित रहेगा।

दो विकल्पों के बीच फंसा बैंक - 
मौजूदा परिस्थितियों में बैंक के सामने दो ही रास्ते बचे हैं। पहला, बैंक स्वयं संचालन में असमर्थता जताते हुए हाथ खड़े कर दे। ऐसी स्थिति में आरबीआई परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त कर बैंक की लेनदारी और देनदारी का आकलन करते हुए उसे समाप्त कर सकता है।

यह विकल्प खाताधारकों के लिए कष्टकारी साबित हो सकता है। सूत्रों के अनुसार बैंक को अभी 50 से 58 करोड़ रुपये की कर्ज वसूली करनी है, जबकि खाताधारकों के लगभग 124 करोड़ रुपये बैंक में जमा हैं। सभी संभावित वित्तीय संसाधनों को जोड़ने के बाद भी बैंक करीब 105 करोड़ रुपये ही जुटा पाने की स्थिति में है। ऐसे में बड़ी संख्या में खाताधारकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मर्जर बना उम्मीद की किरण - 
दूसरा और अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प किसी सक्षम बैंक में विलय (मर्जर) का है। इस स्थिति में खाताधारकों की पूरी जमा राशि सुरक्षित रह सकती है और बकाया कर्ज की वसूली भी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी। बैंक प्रबंधन भी इसी विकल्प को प्राथमिकता दे रहा है।

बैंक के चेयरमैन मयंक ममगाईं ने बताया कि विलय के लिए अल्मोड़ा अर्बन कोऑपरेटिव बैंक को प्रस्ताव भेजा गया है। अल्मोड़ा बैंक ने आवश्यक अभिलेखों की मांग की है, जिनमें से कई उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब तक की प्रक्रिया में अल्मोड़ा बैंक की ओर से संतोषजनक रुख देखने को मिल रहा है।

मर्जर प्रस्ताव की जानकारी आरबीआई को भी दे दी गई है। अंतिम निर्णय नियामक की मंजूरी के बाद ही संभव होगा। फिलहाल खाताधारकों की निगाहें इस संभावित विलय पर टिकी हैं, जो उनके हितों की सुरक्षा का सबसे मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

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