उत्तराखंड - रिटायर्ड शिक्षक को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगों ने उड़ाई जिंदगी भर की कमाई, डर दिखाकर ठग दिए इतने लाख
देहरादून – राजधानी देहरादून में एक चौंकाने वाला साइबर क्राइम सामने आया है, जहां 80 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक को मनी लॉन्ड्रिंग और गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देकर तीन घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया और उनकी जिंदगी भर की कमाई ठग ली गई। साइबर ठगों ने पीड़ित को डराने के लिए खुद को टेलीकॉम विभाग और फिर क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर बात की। उन्होंने कहा कि पीड़ित के नाम से मुंबई में एक सिम कार्ड जारी हुआ है, जिसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है। पीड़ित को बताया गया कि उनके नाम का एटीएम कार्ड 2 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन में पाया गया है, और अब उन पर केस चल सकता है, जिसमें 6 महीने से 5 साल तक की सजा हो सकती है।
डर के साए में तोड़ी FD, SIP और पेंशन -
साइबर ठगों की बातों में आकर बुज़ुर्ग शिक्षक ने अपनी FD, SIP, और पेंशन के पैसे तक तोड़ दिए। उन्होंने पत्नी के खाते से ₹5.73 लाख, खुद की FD से ₹15 लाख पत्नी की FD से ₹26 लाख, SIP से ₹5.47 लाख और पेंशन से ₹1.08 लाख सहित कुल ₹59 लाख ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगों ने और पैसे मांगे तो रिश्तेदारों को शक हुआ और उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने की सलाह दी। इसके बाद साइबर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस ने की पुष्टि, जांच जारी
साइबर क्राइम कंट्रोल के सीओ अंकुश मिश्रा ने बताया, "पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जिन खातों में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनकी जांच की जा रही है।"
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट'?
'डिजिटल अरेस्ट' एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या चैट के जरिए व्यक्ति को मानसिक रूप से डराते हैं। उन्हें कहा जाता है कि वह किसी बड़े अपराध में शामिल हैं, और जांच के नाम पर उनसे पैसे की मांग की जाती है।
महत्वपूर्ण बातें जो सभी को जाननी चाहिए -
कोई भी सरकारी संस्था कॉल या वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।
कोई अधिकारी आपको बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहता।
ऐसे मामलों में घबराएं नहीं, तुरंत 1930 पर कॉल करें या https://cybercrime.gov.in
पर रिपोर्ट दर्ज करें।
अपने बैंक को तुरंत सूचित करें ताकि ट्रांजैक्शन रोका जा सके।
निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम सेल में जाकर FIR दर्ज कराएं।



