देहरादून - बढ़ती बिजली मांग के बीच उत्तराखंड को भीषण गर्मी में बड़ी राहत, इतनी मेगावाट अतिरिक्त बिजली आवंटित
देहरादून - उत्तराखंड को गर्मियों में बढ़ती बिजली मांग के बीच बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुरोध पर केंद्र सरकार के विद्युत मंत्रालय ने राज्य को 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली आवंटित की है। यह आपूर्ति पश्चिमी क्षेत्र के अनआवंटित पूल से 1 मई से 30 जून 2026 तक उपलब्ध रहेगी। चारधाम यात्रा और गर्मी के मौसम में बढ़ती खपत को देखते हुए इस निर्णय को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गर्मियों और यात्रा सीजन में बढ़ता है लोड -
राज्य में हर साल मई-जून के दौरान बिजली की मांग में तेज उछाल आता है। देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में तापमान बढ़ने के साथ कूलर, एसी और अन्य उपकरणों के उपयोग से बिजली खपत बढ़ जाती है। वहीं चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही से भी ऊर्जा की मांग कई गुना बढ़ जाती है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त 150 मेगावाट बिजली मिलने से न केवल शहरों में कटौती कम होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आपूर्ति बेहतर हो सकेगी। पर्यटन और तीर्थ सीजन में यह अतिरिक्त बिजली विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। मुख्यमंत्री ने हाल ही में केंद्र सरकार के साथ राज्य की ऊर्जा जरूरतों पर चर्चा की थी। उन्होंने पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां बिजली मांग में होने वाले उतार-चढ़ाव को प्रमुख मुद्दा बताया था। इसी के बाद केंद्र ने त्वरित निर्णय लेते हुए अतिरिक्त बिजली आवंटित की।
जल विद्युत क्षमता के बावजूद बाहरी निर्भरता -
उत्तराखंड में जल विद्युत परियोजनाओं की अच्छी क्षमता होने के बावजूद सर्दियों में जल स्तर कम होने से उत्पादन घट जाता है। वहीं गर्मियों में मांग बढ़ने के कारण राज्य को बाहर से बिजली खरीदनी पड़ती है। पिछले वर्षों में भी पीक डिमांड के समय अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ी थी। मई-जून चारधाम यात्रा का चरम समय होता है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इस दौरान होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं में बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है। अतिरिक्त आपूर्ति से यात्रा मार्गों और प्रमुख ठहराव स्थलों पर बिजली व्यवस्था बेहतर रहने की उम्मीद है।
कटौती में कमी और उद्योग को लाभ -
अतिरिक्त बिजली का उपयोग पीक आवर्स—सुबह और शाम—में किया जाएगा, जिससे अधिकतम उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। इससे लोड शेडिंग में कमी आएगी और औद्योगिक इकाइयों को भी स्थिर बिजली आपूर्ति मिलेगी, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। राज्य सरकार केवल अस्थायी राहत पर निर्भर नहीं रहना चाहती। सौर ऊर्जा, पंप स्टोरेज और नई जल विद्युत परियोजनाओं पर काम जारी है। साथ ही स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों को बढ़ावा देकर भविष्य में मांग और आपूर्ति के बेहतर संतुलन की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
