देहरादून - बारह दस्तावेजों से मिलेगी राहत, SIR में ऐसे जुड़ेगा वोटर लिस्ट में नाम, 2003 की वोटर लिस्ट न होने पर भी मिलेगा मौका
देहरादून - उत्तराखंड में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी तैयारी कर ली है। आयोग ने एसआईआर की विस्तृत प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की सूची जारी कर दी है। खास बात यह है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, तब भी वह निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज करा सकेगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार, एसआईआर के लिए वर्ष 2003 की मतदाता सूची को आधार माना जाएगा। हालांकि जिन लोगों का नाम उस सूची में नहीं मिलेगा, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयोग ने ऐसे 12 दस्तावेजों को मान्यता दी है, जिनके जरिए मतदाता अपनी पहचान और पात्रता साबित कर सकेंगे।
इन दस्तावेजों में केंद्र या राज्य सरकार तथा पीएसयू कर्मचारियों के पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश, 1 जुलाई 1987 से पहले जारी सरकारी या बैंक संबंधी प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, परिवार रजिस्टर और भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र शामिल हैं। आयोग की योजना के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया शुरू होते ही बीएलओ वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करेंगे। इन प्रपत्रों पर बीएलओ का नाम और मोबाइल नंबर भी दर्ज रहेगा। मतदाताओं को इसमें वर्ष 2003 की वोटर सूची से जुड़ी जानकारी भरनी होगी। यदि उस समय उनका नाम सूची में नहीं था, तो माता-पिता या दादा-दादी के वोट संबंधी विवरण देने होंगे।
मतदाताओं को गणना प्रपत्र पर नया फोटो भी लगाना होगा और भरने के बाद इसे बीएलओ को वापस जमा करना होगा। यदि किसी मतदाता के पास वर्ष 2003 का कोई रिकॉर्ड नहीं है, तो उसे यह जानकारी प्रपत्र में दर्ज करनी होगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग की ओर से संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके आधार पर वह ईआरओ कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा करा सकेगा। निर्वाचन आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और सूची को अधिक पारदर्शी व शुद्ध बनाना है।
