देहरादून - टोंस नदी प्रोजेक्ट किशाऊ बांध विवाद खत्म, हिमाचल तैयार उत्तराखंड को मिलेगा ऊर्जा और विकास का बड़ा तोहफा

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देहरादून - टोंस नदी प्रोजेक्ट किशाऊ बांध विवाद खत्म, हिमाचल तैयार उत्तराखंड को मिलेगा ऊर्जा और विकास का बड़ा तोहफा

देहरादून - करीब दो दशक से अटकी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना अब धरातल पर उतरने की ओर बढ़ गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमत हो गए हैं। इसके बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। टोंस नदी पर उत्तराखंड-हिमाचल सीमा में प्रस्तावित किशाऊ परियोजना केवल एक बांध नहीं, बल्कि उत्तराखंड के लिए ऊर्जा, रोजगार, आधारभूत ढांचे और राजस्व का बड़ा स्रोत बन सकती है। परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त है और जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी।

उत्तराखंड को क्या होंगे बड़े लाभ?
1. वित्तीय बोझ में बड़ी राहत
सबसे बड़ी राहत यह है कि उत्तराखंड को अपने हिस्से के खर्च के लिए केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत ब्याजमुक्त ऋण मिलेगा। इससे राज्य पर वित्तीय दबाव काफी कम होगा और परियोजना में हिस्सेदारी आसान हो जाएगी।

2. जल भंडारण और सिंचाई को मजबूती
किशाऊ परियोजना में बड़े पैमाने पर जल भंडारण की व्यवस्था होगी। परियोजना से यमुना बेसिन में सिंचाई क्षमता बढ़ाने और जल संकट वाले क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार परियोजना लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई में सहायक हो सकती है।

3. जलविद्युत उत्पादन से आय
परियोजना से बड़े पैमाने पर जलविद्युत उत्पादन होगा। संशोधित परियोजना रिपोर्ट के अनुसार इसकी विद्युत क्षमता 660 मेगावाट तक प्रस्तावित है। इससे उत्तराखंड को ऊर्जा उत्पादन, बिजली उपलब्धता और दीर्घकालिक राजस्व में लाभ मिलने की संभावना है।

4. स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियां
बांध निर्माण के दौरान हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे। सड़क, पुल, परिवहन, निर्माण सामग्री, होटल और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। उत्तरकाशी और जौनसार-बावर क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।

5. यमुना में बढ़ेगा स्वच्छ जल प्रवाह
विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना से यमुना में सालभर नियंत्रित और स्वच्छ जल छोड़ा जा सकेगा। इससे नदी के पर्यावरणीय प्रवाह में सुधार होगा और यमुना पुनर्जीवन अभियान को मजबूती मिलेगी।

अभी भी हैं चुनौतियां -
हालांकि परियोजना को लेकर सहमति बन गई है, लेकिन विस्थापन, पर्यावरणीय प्रभाव, वन भूमि और स्थानीय लोगों के पुनर्वास जैसे मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण रहेंगे। परियोजना क्षेत्र में आने वाले गांवों के लोगों की चिंताओं का समाधान करना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

क्या है किशाऊ परियोजना? - 
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। इसे 2008 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था, लेकिन लागत बंटवारे, जल हिस्सेदारी और राज्यों के बीच सहमति न बनने के कारण यह वर्षों तक अटकी रही। अब छह राज्यों की सहमति के बाद इसके निर्माण का रास्ता लगभग साफ हो गया है।

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