देहरादून - परिवार रजिस्टर में गड़बड़ी, सरकार ने जांच के दिए आदेश, 9 महीनों में इतने लाख नए परिवार जुड़े, उड़े होश
देहरादून - ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर से संबंधित मौजूदा नियमावली का पालन न होने के गंभीर मामले सामने आए हैं। पंचायतीराज विभाग की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मिलीभगत के चलते बिना उचित जांच के परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जा रहे हैं। यहां तक कि अन्य राज्यों से आकर किराए पर रह रहे लोग भी परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड में पिछले 9 महीनों में 2.66 लाख नए परिवार रजिस्टर बने हैं। इन आवेदनों पर धामी सरकार ने जांच शुरू कर दी है। 2003 से रजिस्टर DM कस्टडी में, फर्जी प्रविष्टियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश। डेमोग्राफी चेंज की आशंका के बीच नियमावली में संशोधन की तैयारी चल रही है।
जांच में यह भी पाया गया कि कई ग्राम पंचायतों में परिवार रजिस्टर में पृष्ठ संख्या तक अंकित नहीं है। कुछ रजिस्टरों में नाम अलग-अलग कागजों पर लिखकर चिपकाए गए हैं, जबकि कई मामलों में सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं कराए गए। इन गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने परिवार रजिस्टरों की व्यापक जांच कराने का निर्णय लिया है।
पंचायतीराज विभाग की नियमावली के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में स्थायी रूप से निवास कर रहे प्रत्येक परिवार का नाम ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। नियमों में प्रविष्टियों के शुद्धीकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी निर्धारित है। परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को दिया गया है, जबकि इससे संबंधित अपील का अधिकार उपजिलाधिकारी के पास है। हालांकि, ग्राम पंचायत में “स्थायी निवास” की स्पष्ट परिभाषा न होने का फायदा उठाकर मनमाने ढंग से नाम दर्ज किए जा रहे हैं।
पिछले वर्ष परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे, जिनमें से कई को निरस्त किया गया। इसी दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज किए जाने की शिकायतें सामने आईं। विभागीय सूत्रों के अनुसार जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ कि कई लोगों ने परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराकर आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य सरकारी सुविधाएं हासिल कर लीं और योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि मौजूदा नियमों की अनदेखी और निगरानी तंत्र की कमी के कारण यह स्थिति बनी। इसे देखते हुए सरकार अब परिवार रजिस्टर से संबंधित नियमावली में संशोधन की तैयारी कर रही है, ताकि प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके और फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके।
