देहरादून - बजट 2026 में न विज़न है, न इच्छाशक्ति, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने रिफॉर्म एक्सप्रेस पर साधा निशाना
| Feb 1, 2026, 19:16 IST
देहरादून - नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने केंद्रीय बजट 2026 को देश की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से पूरी तरह कटा हुआ बताते हुए कहा कि यह बजट किसी भी बड़ी समस्या का समाधान नहीं देता।
उन्होंने कहा कि सरकार का “मिशन मोड” अब “चैलेंज रूट” बन चुका है और तथाकथित “रिफॉर्म एक्सप्रेस” किसी रिफॉर्म के जंक्शन पर रुकती नज़र नहीं आती। उनके अनुसार बजट में न तो कोई स्पष्ट पॉलिसी विज़न है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई देती है।
यशपाल आर्य ने कहा कि देश के अन्नदाता किसान आज भी किसी ठोस कल्याणकारी सहायता या आय सुरक्षा योजना का इंतज़ार कर रहे हैं। उन्होंने बढ़ती असमानता पर चिंता जताते हुए कहा कि यह ब्रिटिश शासन के स्तर से भी आगे निकल चुकी है, लेकिन बजट में इसका कोई ज़िक्र तक नहीं है। साथ ही SC, ST, OBC, EWS और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए भी किसी तरह की विशेष सहायता की घोषणा नहीं की गई।
वित्त आयोग की सिफारिशों पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनका और अध्ययन ज़रूरी है, लेकिन मौजूदा संकेत बताते हैं कि गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे राज्यों को इससे कोई खास राहत नहीं मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि संघीय ढांचा इस बजट का शिकार हुआ है।
यशपाल आर्य ने बजट में मौजूद कमियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग आज भी 13 प्रतिशत पर अटकी हुई है और इसके पुनरुद्धार की कोई रणनीति नहीं दिखाई देती। “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों का बजट में कोई ठोस प्रतिबिंब नहीं है।
रोज़गार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए नौकरियों और महिलाओं की वर्कफोर्स भागीदारी बढ़ाने को लेकर कोई गंभीर योजना नहीं है। पिछली इंटर्नशिप और स्किल डेवलपमेंट योजनाओं के नतीजों पर भी सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।
एक्सपोर्ट और ट्रेड के मोर्चे पर गिरते निर्यात, बढ़ते व्यापार घाटे, टैरिफ जोखिम और कमजोर होते रुपये को लेकर बजट में कोई स्पष्ट योजना नहीं होने का आरोप भी उन्होंने लगाया।
गरीब और मध्यम वर्ग को लेकर उन्होंने कहा कि महंगाई से राहत, घटती बचत, बढ़ते कर्ज और स्थिर वेतन जैसे मुद्दों पर बजट पूरी तरह मौन है। उपभोक्ता मांग को दोबारा खड़ा करने के लिए कोई रोडमैप नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि निजी निवेश के लिए भरोसा जगाने वाला कोई संकेत नहीं है। FDI में ठहराव और वेतन वृद्धि की सुस्ती को नज़र अंदाज़ किया गया है, जबकि बड़े स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की ज़रूरत थी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार द्वारा पुराने वादों को दोहराने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि ज़मीन पर डिलीवरी गायब है और शहर अब भी रहने लायक नहीं बन पाए हैं। “स्मार्ट सिटी” और रहने योग्य शहरों का सपना अब भी अधूरा है।
सोशल सिक्योरिटी के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बजट में कोई भी महत्वपूर्ण घोषणा नहीं की गई। MGNREGA की जगह लाने की बात किए जा रहे नए कानून के लिए आवंटन पर भी सरकार ने चुप्पी साधे रखी।
अंत में यशपाल आर्य ने कहा कि यह बजट न समाधान देता है और न ही नीतिगत विफलताओं को ढकने के लिए कोई नया नारा पेश करता है।
WhatsApp
Group
Join Now
