हल्द्वानी - मंच शुद्धीकरण मामले में SC-ST की धाराओं में राहुल गांधी पर मुकदमा दर्ज, राजनीतिक घमासान हुआ तेज
हल्द्वानी - कांग्रेस की रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए कथित मंच शुद्धीकरण के मामले ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। श्रीराम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के कार्यकर्ताओं की ओर से कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी कोतवाली में तहरीर दी गई। शिकायत में राहुल गांधी पर अनुसूचित जाति के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ताओं में विनोद कुमार आर्य और अमित कुमार शामिल हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि राहुल गांधी के बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस से अनुसूचित जाति समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोप सही पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
नैनीताल के एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने बताया कि दलित समाज से आने वाले अमित नाम के व्यक्ति की ओर से शिकायत दी गई थी। तहरीर में कहा गया कि राहुल गांधी के बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस से शिकायतकर्ता और उनके समाज को चोट पहुंची है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(Q) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी अमित कुमार सैनी को सौंपी गई है।
शिकायतकर्ता अमित कुमार का कहना है कि रामलीला मैदान में गंदगी फैली होने के कारण उनकी संस्था की ओर से सफाई अभियान चलाकर शुद्धीकरण किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले को लेकर राहुल गांधी की ओर से अनर्गल बयानबाजी की गई, जिसके बाद समाज के लोगों के साथ मिलकर उनके खिलाफ तहरीर दी गई।
दरअसल, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली आयोजित हुई थी। रैली के बाद हिंदूवादी संगठन की ओर से कथित तौर पर मैदान में शुद्धीकरण यज्ञ किए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद कांग्रेस और हिंदूवादी संगठनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई। अब राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मुकदमे के बाद यह विवाद और गहराता नजर आ रहा है। कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है, जबकि शुद्धीकरण कराने वाले पक्ष का कहना है कि उसने केवल सफाई और धार्मिक परंपरा के तहत कार्यक्रम किया था।



