अल्मोड़ा - गैरसैण में बजट सत्र नहीं कराने पर बरसे कुंजवाल, बोले भाजपा सरकार को माफ़ नहीं करेगी उत्तराखंड की जनता 
 

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अल्मोड़ा - बजट सत्र को गैरसैण में ना करा कर देहरादून में कराने को लेकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट सत्र को गैरसैण में ना कराकर भाजपा सरकार द्वारा जो देहरादून में कराने का निर्णय लिया है उससे उत्तराखण्ड राज्य की मूल भावनाओं को बहुत बड़ा आघात लगा है। जिस कारण तरह-तरह की संकायें उत्पन्न हो रही हैं। राज्य प्राप्ति के आन्दोलन का इतिहास सबको मालूम है। यद्धपि उस इतिहास को भी उत्तराखण्ड की जनता भूलती जा रही है जिससे उत्तराखण्डियत पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जहां तक गैरसैण का प्रश्न है यह आन्दोलन के समय ही उत्तराखंड क्रान्तिदल द्वारा राजधानी घोषित कर दिया गया था। जो आन्दोलनकारियों की भावनाओं के अनुरुप सही माना जा रहा था। 


कुंजवाल ने कहा विधान भवन बनाने का निर्णय तत्कालीन मुख्यमंत्री व तत्कालीन सांसद सतपाल महाराज का था। जिसे सरकार की कैबिनेट द्वारा भी स्वीकृति दी गयी थी। आश्चर्य यह लगता है कि यह दोनों नेता आज भाजपा में हैं। जो आज गैरसैण की उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं। यह सारा आरोप भारतीय जनता पार्टी के उपर सही सिद्ध होता है। क्योंकि कांग्रेस की सरकार ने भवन बनाने कर निर्णय लिया तथा कांग्रेस की ही सरकार ने हरीश रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में सैकड़ों, करोड़ रुपया खर्च कर सारा इन्सटैक्चर (ढांचा) खड़ा करने का कार्य किया फिर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के मुख्यमंत्रित्व काल में ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय लिया गया। 

जिसको उत्तराखण्ड की जनता ने फिलहाल स्वागत योग्य कदम बताया। कई वर्षों बाद भी ग्रीष्मकालीन राजधानी का निर्णय केवल आदेश मात्र ही देखने को मिल रहा है। जमीनी स्तर पर इसका कोई तनिक मात्र भी लाभ अभी तक नही मिल पाया। ग्रीष्मकालीन राजधानी का शासनादेश होने के बाद कम से कम 4 माह के काम-काज को प्रदेश सरकार द्वारा गैरसैण से ही संचालित करना चाहिए था। जो देखने को नही मिला। अब वर्तमान सरकार ने सारी हदों को पार कर दिया है न तो वह पिछली सरकार में विधानसभा के द्वारा पारित प्रस्ताव जो हमेशा गैरसैण में आहूत करके बजट पास किया जायेगा उसका पालन कर पा रही है न ग्रीष्मकालीन राजधानी के अर्थ के समझकर कोई कार्यवाही कर पा रही है और न ही पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  के द्वारा मौन उपवास करने की भावनाओं को भी समझ पा रही है। 


उन्होंने कहा प्रदेश की विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष करन माहरा द्वारा उत्तराखण्ड की भावनाओं को समझते हुए प्रतीकात्मक विधानसभा सत्र संचालित करते हुए यह संदेश देने का कार्य किया कि वर्तमान भाजपा की सरकार सारे पुराने निर्णयों की उपेक्षा करते हुए राज्य निर्माण की मूल भावनाओं को नकारने का काम कर रही है। उन्होंने कहा मैं भी आज गैरसैण में होता व्यक्तिगत आवश्यकीय कार्यों की वजह से नही जा पाया, जिसका मुझे दुख भी है और मैं प्रदेश अध्यक्ष का वह वहां पहुंचे अनेक साथियों का धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने राज्य निर्माण की मूल भावनाओं को समझा है, मैं हमेशा गैरसैण के मुद्दे पर आप सब लोगों के साथ खड़ा रहूंगा। मेरा भाजपा की वर्तमान सरकार पर सीधा आरोप है कि जिस तरह से वर्तमान सरकार (भाजपा) ने स्थाई राजधानी के मुद्दे को ठण्डे बस्ते में डालने का काम किया तथा सैकड़ों करोड़ रुपया जो गैरसैण मे खर्च हुआ है उसकी कोई परवाह नही की इसके लिए उत्तराखंड की जनता कभी उन्हें कभी माफ नही करेगी।