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‘रोमांस’ का शहर : सैलानियों को लुभाने वाला अनोखा पर्यटन स्थल है केरल, यहां के नजारे देख आप विदेशी लम्हे भी भूल जाएंगे

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दक्षिण भारत अर्थात केरल, केरल किसी भी प्रकार की छुट्टी के लिए भारत में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों में से कुछ है और इसे देवताओं के देश के रूप में जाना जाता है। यह नारियल, अप्रवाही की भूमि, संस्कृति और परंपराओं का देश माना जाता है। यह पृथ्वी पर सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है जो “Gods Own Country” के नाम से भी प्रसिद्ध है। केरल किसी भी प्रकार के परिवार की छुट्टी या हनीमून के लिए दुनिया में सबसे अच्छे स्थलों में से एक है। यह संस्कृतियों, परम्पराओं और लोक नृत्यों का क्षेत्र है। समंदर का जो नजारा केरल में है वह शायद ही हिंदुस्तान के किसी कोने में हो।

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केरल एक अनोखा पर्यटक स्थल है जो पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करता है। केरल पर्वत-पहाडिय़ों और नदियों से घिरा हुआ है। वर्षा ऋतु मे यहा का नजारा देखने लायक होता है जो बेहद खूबसूरत लगता है। केरल को मानसून सीजन मे ड्रीम सीजन के नाम से भी जाना जाता है। केरल आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के लिए बहुत फेमस है इसलिए ज्यादा तर लोग इस मौसम को चुनते है और इस मौसम मे बॉडी को उपयुक्त वातावरण भी मिलता है। इस मौसम मे लोगो को आकर्षक ऑफर भी मिलते है। यहां की हरियाली मन को लुभा लेने वाली है। वहा के लोग भले ही कम अंग्रेजी और हिन्दी समझते है लेकिन वहा आपको मेहमान नवाजी मे कोई कमी महसूस नही होगी। केरल का खाना बहुत ही स्वादिष्ट होता है जो वो केले के पत्ते मे परोसा जाता है। यहाँ का दृश्य देख के आप विदेशी लम्हे भी भूल जाएगे।

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केरल राज्य में कुल 14 जिले हैं जिनमें कासरगोड, कन्नूर, वायनाड, कोझीकोड, मालाप्पुरम, पलक्कड़, त्रिशुर, एर्नाकुलम, इडुकी, कोट्टयम, अलप्पुझा ( अलेप्पे ), पथानमथीट्टा, कोल्ल्म, तिरूवनंतपुरम सबसे ज्यादा प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से हैं।

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पर्यटन स्थल होने के करण इन स्थलों की केरल में ज्यादा प्रसिद्धि है वैसे यहां के अन्य जिले भी काफी सुंदर हैं। भ्रमण करने के शौकीन पर्यटकों के लिए केरल, पर्यटन के लिए क्षैतिज स्थल है यानि यहां आकर पर्यटक एक साथ कई स्थानों पर सैर करके दुनिया के सबसे सुंदर प्राकृतिक नजारों को देख सकते हैं। गर्मियों के मौसम में यहाँ सफर करना काफी बेहतर होगा।

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खूबसूरत और दुर्लभ प्रजाति का जलीय जीवन

केरल में कुछ बहुत शानदार वॉटरवे, खाडिय़ां, झीलें, नहरें, नदियां आदि हैं। यहां पानी का इतना बड़ा इंटरलॉकिंग नेटवर्क है कि हाउसबोट से आराम से यात्रा की जा सकती है। केरल के बैकवॉटर में आपको कुछ सबसे खूबसूरत और दुर्लभ प्रजाति का जलीय जीवन मिलेगा, जैसे मेंढक से लेकर केंकड़े, मडस्कीपर, किंगफिशर, जलकाग, डार्टर और कछुए और कोर्टर तक। बैकवॉटर के किनारे लगे पत्तेदार पौधे, झाडिय़ां, खजूर के पेड़ पूरे माहौल में हरियाली भर देते हैं। कुछ सबसे खूबसूरत केरल बैकवॉटर जो आप देख सकते हैं उनमें कोल्लम बैकवॉटर, अल्लेप्पी बैकवॉटर, कोझीकोड बैकवॉटर, कोचीन बैकवॉटर, कासरगोड बैकवॉटर आदि हैं।

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केरल की इस सुंदर धरती पर बड़ी संख्या में खूबसूरत हिल स्टेशन हैं जो कि केरल की अपील को और बढ़ाते हैं। यदि आपको शहर की भागदौड़ से दूर एक ब्रेक की जरुरत है तो आप केरल के ये सुंदर पर्वत देख सकते हैं। यहां के कुछ खूबसूरत हिल स्टेशनों में से कुछ हैं – मुन्नार, रानीपुरम, देवीकुलम, पोनमुडी, इडुक्की, पायथल माला। इन जगहों की लुभावनी हरियानी देखने लायक है।

केरल बैकवाटर्स

केरल बैकवाटर्स से पांच बड़ी-बड़ी झीले जुडी हुई हैं। बैकवाटर के साथ आयोजित वार्षिक सांप नाव दौड़, स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए मनोरंजन का बड़ा स्रोत भी प्रदान करता है। केरल के पर्यटन स्थलों में से बैकवाटर सबसे मसहुर है। यहां के हरे-भरे लैंडस्केप, विविध वन्यजीव, और घरों और गाँवों का सुन्दर दृश्य आपको अपनी यात्रा में देखने को मिल सकता है। ज्यादातर लोग जो केरल के बैकवाटरों की यात्रा करते हैं, वे एक पारंपरिक केरल-शैली वाले हाउसबोट रखते हैं, जिसे केटुवाल्म भी कहा जाता है। भारत का सबसे शांत और आरामदायक अनुभव केरल की यात्रा है। ताजा पकाया भारतीय भोजन और ठंडा बीयर अनुभव को और भी सुखद बना देता है। आप चाहे तो एक दिन की यात्रा पर जा सकते हैं या नाव पर रात भर भी रह सकते हैं।

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केरल की संस्कृति

भारत की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है जिसमें कला के कई रूपों के विभिन्न पहलू, भोजन, पहनावा आदि शामिल हैं। कथकली और मोहिनीअट्टम यहां के प्रमुख नृत्य रूप हैं जो सारी दुनिया में सराहे जाते हैं।

केरल में मुख्य रूप से तीन धर्मो को माना जाता है – हिंदू, ईसाई और इस्लाम। केरल कई मंदिरों का घर है और एक ऐसा स्थान है जहां देवी को भगवती के स्वरूप में पूजा जाता है और पुकारा जाता है। चोट्टानिक्कारा भगवती मंदिर, अट्टुकल भगवती मंदिर, कोडूनगल्लूर भगवती मंदिर, मीनूकुलाथी भगवती मंदिर, मंगोट्टू कावू भगवती मंदिर आदि यहां के प्रमुख भगवती मंदिर हैं जहां केरल और अन्य आसपास के राज्यों से हजारों श्रद्धालु और तीर्थयात्री, यात्रा और दर्शन करने आते हैं।

मालायट्टुर चर्च, कोच्चि में सेंट फ्रांसिस चर्च, कोच्चि किले में सांता क्रूज बेसील्लीका, कोयट्टम के निकट सेंट मेरी फोरेंस चर्च आदि केरल के प्रमुख चर्च हैं। पझायंगढी मस्जिद, मदायी मस्जिद, चेरामन जुमा मस्जिद, कांजीरमट्टोम मस्जिद, मलिक दिनार मस्जिद भी केरल के कुछ धार्मिक स्थल हैं, यह उन लोगों के लिए खास हैं जो इस्लाम में विश्वास रखते हैं।

फोर्ट कोची, केरल

कोची एक आकर्षक शहर है जिसका एक उदार प्रभाव है। इसे “गेटवे टू केरल” के नाम से भी जाना जाता है। फोर्ट कोची वास्तुकला और ऐतिहासिक स्थलों से भरे हुए हैं और चारों ओर घूमने की अद्भुत जगह है। आप यहाँ कथकली नृत्य प्रदर्शन भी पा सकते हैं। फोर्ट कोची में आर्किटेक्चर और ऐतिहासिक स्थल क्षेत्र के अधिकांश आगंतुकों को आकर्षित करते हैं। फोर्ट कोची पैदल या साईकिल से घुमने के लिए उत्कृष्ट स्थान है।

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केरल के पर्यटन स्थल

कोवलम : यह प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। कोवलम में तीन अर्द्धचंद्राकार समुद्र तट हैं। इन तीनों समुद्र तटों में से सर्वाधिक प्रसिद्ध किनारा ‘लाइटहाउस’ है। इस समुद्री तट पर पहुंचना भी सरल है। यह केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से सोलह किलोमीटर की दूरी पर है।

कप्पड़ : इसी स्थान पर 1498 ई. में वास्को द गामा आया था। ऐतिहासिक दंत कथाएं और रीति-रिवाज से भरा है यह स्थान। कप्पड़ में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं की भी प्रसिद्धी है। कप्पड़ कोझीकोड से 14 कि.मी. की दूरी है।

बेकल : केरल का एक अन्य समुद्री तट है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है, जहां बेकल का क़िला लंबे सुंदर नारियल के पेड़ों से घिरे दो द्वीपों के बीच में है। केरल में यह सबसे बड़ा व संरक्षित क़िला है। यह क़िला विभिन्न ताकतों जैसे विजयनगर साम्राज्य, टीपू सुल्तान तथा अंग्रेज़ी हुकूमत की कहानी कहता है। यह कोझीकोड से 160 किलोमीटर दूर है।

पूवर आइसलैंड : यह भी केरल की सुंदर जगहों में से एक है, यहाँ झील, नदी, समुद्र सबकी सुन्दरता देखने को मिलती है। यहाँ भी क्रुज के द्वारा आप प्रकति में विचरण कर सकते है। समुद्र तट पर गोल्डन रेत बीच को सुंदर बना देती है, बेकवाटर में क्रूज का मजा लेना बहुत सुहावना होता है। ऐसा लगता है, प्रकति ये यहाँ कोई जादू कर दिया है। यहाँ पर भी झील में बोटहाउस कॉटेज का मजा लिया जा सकता है, साथ ही झील के किनारे भी कॉटेज बने हुए रहते है, जिसमें भी आप रुक कर प्रकति के मजे ले सकते है।

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कुमारकोम : कुमारकोम, कोट्टायम के पास में स्थित है. यह केरल का एक मुख्य आकर्षण में से एक है। यह 14 एकड़ का पक्षी अभयारण्य है, जहाँ तरह तरह की पक्षियों की प्रजाति पाई जाती है। यह प्रवासी पक्षीयों का पसंदीदा स्थान है. कुमारकोम भी एक शानदार बेकवाटर की जगह है और इसलिए आप एक नौका विहार की सवारी पर यहाँ जा सकते हैं। यहाँ आयुर्वेदिक स्पा की भी व्यवस्था है. जिसे लेकर लोगों को आत्मिक एवं मानसिक शांति मिलती है. यहाँ वेमबानाद लेक भी है, जिसे देखने लोग आते है। यह केरल का सबसे बड़ा लेक है, साथ ही ये भारत का सबसे लम्बा लेक है. इस लेक पर क्रुज से जाकर आप सूर्योदय या सूर्यास्त का मजा ले सकते है।

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मुन्नार : दक्षिण भारत के केरल का सबसे प्रसिद्ध हिल स्टेशन मुन्नार है। मुन्नार में तीन नदियाँ कुण्डले, मुद्रपुज्हा एवं नाल्लाथान्नी का मिलन होता है. यह पश्चिमी घाट पर 1524 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहाँ 80 हजार मील के क्षेत्र में हरी चाय के बागान है, जो ऊँची पहा?ी के ढाल में स्थित है। आप इन बागानों को देख बहुत अच्छा महसूस करेंगें. हरे भरे परिदृश्य, झरने, झील, जंगल और चाय बागान इस जगह को पृथ्वी पर एक स्वर्ग बनाते हैं. यहाँ आप पैराग्लाइडिंग, ट्रैकिंग और रॉक क्लाइम्बिंग जैसे एडवेंचर का भी मजा ले सकते है।

पीरमेड : केरल का यह सुंदर पर्वतीय स्थल समुद्री तल से 915 मीटर की ऊंचाई पर है। पेरियार वन्यप्राणी उद्यान के रास्ते में पड़ता है। किसी समय में ट्रावनकोर के महाराजाओं का ग्रीष्मकालीन आवास गृह हुआ करता था। सडक़ किनारे यहाँ चाय, कॉफी, इलायची, रबर व यूक्लिप्टस के बागान और साथ में प्राकृतिक घास के मैदान व घने जंगल मिलते हैं। यह स्थान कोट्टयम से 75 कि.मी. दूर है।

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विथीरी : यह पर्वतीय स्थल केरल के उत्तर-पूर्वी भाग में समुद्र तल से 1300 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। विथीरी कॉफी, चाय, इलायची, काली मिर्च व रबर के लिए प्रसिद्ध है। कोहरे से ढकी पहाडिय़ां तथा विस्मयकारी दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कोझीकोड से 100 कि.मी. दूर है।
पोनमुडी : समुद्र स्तर से 915 मीटर ऊंचाई पर स्थित पोनमुडी एक संकीर्ण, घुमावदार रास्तों वाला पर्वतीय स्थल है। सुंदर पहाड़ी फूलों, विलक्षण तितलियों, छोटी-छोटी नदियों तथा झरनों के लिए प्रसिद्ध यह स्थान ट्रेकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। यह स्थल तिरुवनंतपुरम से 61 कि.मी. की दूरी पर है।

पेरियार : यह वन्यप्राणी उद्यान भारत के बड़े वन्य प्राणी उद्यानों में से एक है। पेरियार वन्यप्राणी उद्यान बाघ संरक्षण के लिए है। 777 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य की सुंदरता यहाँ के घने जंगल और 20 वर्ग किलोमीटर में फैली झील है। नौका विहार द्वारा इस वन्यप्राणी उद्यान को देख सकते हैं। हाथियों के झुंड यहाँ का आकर्षण हैं जो झील के पानी में उतर आते हैं। बाघ, सांभर, जंगली भैंसा, धब्बेदार हिरन, चीता, मालाबार गिलहरियां तथा धारीदार गर्दन वाला नेवला आदि भी यहाँ दिख्तें हैं। एक महत्त्वपूर्ण मसाला व्यापार केंद्र, कुमली भी पास में है। यह स्थान कोच्चि से 190 किलोमीटर की दूरी पर है।

कोलाम वाटर स्पोर्ट्स : मालाबार तट का प्राचीनतम बंदरगाह कोलाम कभी अंतर्राष्ट्रीय मसाला व्यापार केंद्र था। तिरुअनंतपुरम के उत्तर में इस ऐतिहासिक शहर का 30 प्रतिशत हिस्सा अस्थमुडी झील से घिरा है। कोलाम तथा अलाप्पुजा के बीच यह 8 घंटे का सफर सबसे लंबा तथा केरल के जलप्रपातों का मोहक अनुभव है। कोलाम तिरुअनंतपुरम से लगभग 72 किलोमीटर दूर है।

अलाप्पुजा : नौका दौड़, हाउसबोट, समुद्री किनारों, समुद्री उत्पाद तथा जूट उद्योगों के लिए प्रसिद्ध अलाप्पुजा को ‘पूरब का वेनिस’ भी कहा जाता है। केरल में कट्टानड़ ही शायद विश्व का ऐसा स्थान है जहां समुद्र तल से नीचे खेती की जाती है।

कुमाराकम : कोट्टयम से 12 किलोमीटर दूर यह तंबानड़ स्थल झील के किनारे स्थित है। इसे कट्टानड़ के जलप्रपातों का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। ‘कुमाराकम पक्षी उद्यान’ विश्व के प्रवासी पक्षियों का मनपसंद बसेरा है।

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कोच्चि : केरल की व्यावसायिक तथा औद्योगिक राजधानी कोच्चि विश्व के बेहतरीन प्राकृतिक बंदरगाहों में से एक है। इस शहर में राष्ट्रमंडल का प्राचीनतम यहूदी प्रार्थना भवन तथा अनेक प्राचीन चर्च व मंदिर भी हैं। इस यहूदी प्रार्थना भवन के आस-पास जीउ टाऊन है जो मसाला व्यापार तथा कलाकृतियों की दुकानों का केंद्र है। इस सुंदर टापुओं वाले शहर में अरब, चीन, हालैंड, ब्रिटेन तथा पुर्तग़ाल के अनेक समुद्री यात्रियों का प्रभाव देखने को मिलता है। कोच्चि में घूमने का पूरा आनंद साधारण नौकाओं में बैठकर ही लिया जा सकता है। कोच्चि भारत के सभी शहरों से वायु, समुद्र तथा रेलवे लाइनों से पूरी तरह जुड़ा हुआ है। सबसे

खजाने के लिए चर्चा में रहने वाले पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास!

केरल के तिरुवनन्तपुरम में मौजूद भगवान विष्णु का प्रसिद्ध मंदिर है। भारत के प्रमुख वैष्णव मंदिरों में शामिल यह ऐतिहासिक मंदिर तिरुवनंतपुरम के पर्यटन स्थलों में से एक है। ये मंदिर अपने खजाने के लिए लगातार चर्चा में रहता है। द्मनाभस्वामी मंदिर को त्रावणकोर के राजाओं ने बनाया था। इसका जिक्र 9 शताब्दी के ग्रंथों में भी आता है। लेकिन मंदिर के मौजूदा स्वरूप को 18वीं शताब्दी में बनवाया गया था। 1750 में महाराज मार्तंड वर्मा ने खुद को पद्मनाभ दास बताया। इसके बाद शाही परिवार ने खुद को भगवान पद्मनाभ को समर्पित कर दिया।
माना जाता है कि इसी वजह से त्रावणकोर के राजाओं ने अपनी दौलत पद्मनाभ मंदिर को सौंप दी। त्रावणकोर के राजाओं ने 1947 तक राज किया। आजादी के बाद इसे भारत में विलय कर दिया गया। लेकिन पद्मनाभ स्वामी मंदिर को सरकार ने अपने कब्जे में नहीं लिया। इसे त्रावणकोर के शाही परिवार के पास ही रहने दिया गया।

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तब से पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट चलाता आ रहा है। जानकारों का ये भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निजाम जैसे देश के शाही परिवारों की दौलत को अपने कब्जे में ले रही थी तब हो सकता है कि त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने अपनी दौलत मंदिर में छुपा दी हो। तब से पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट चलाता आ रहा है। जानकारों का ये भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निजाम जैसे देश के शाही परिवारों की दौलत को अपने कब्जे में ले रही थी तब हो सकता है कि त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने अपनी दौलत मंदिर में छुपा दी हो। तब से पद्मनाभ स्वामी मंदिर का कामकाज शाही परिवार के अधीन एक प्राइवेट ट्रस्ट चलाता आ रहा है। जानकारों का ये भी कहना है कि जब भारत सरकार हैदराबाद के निजाम जैसे देश के शाही परिवारों की दौलत को अपने कब्जे में ले रही थी तब हो सकता है कि त्रावणकोर के तत्कालीन राजा ने अपनी दौलत मंदिर में छुपा दी हो।

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यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी है। मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा मिली थी जिसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड ने करवाया था। यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी है। मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा मिली थी जिसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड ने करवाया था।
यहां पर भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा जाता है। पद्मनाभ स्वामी मंदिर के साथ एक पौराणिक कथा जुड़ी है। मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान से विष्णु भगवान की प्रतिमा मिली थी जिसके बाद यहां पर मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर का निर्माण राजा मार्तण्ड ने करवाया था।

मंदिर में एक स्वर्णस्तंभ भी बना हुआ है जो मंदिर की खूबसूरती में इजाफा करता है। मंदिर के गलियारे में अनेक स्तंभ बनाए गए हैं जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को सा?ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर में एक स्वर्णस्तंभ भी बना हुआ है जो मंदिर की खूबसूरती में इजाफा करता है। मंदिर के गलियारे में अनेक स्तंभ बनाए गए हैं जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है।
मंदिर में एक स्वर्णस्तंभ भी बना हुआ है जो मंदिर की खूबसूरती में इजाफा करता है। मंदिर के गलियारे में अनेक स्तंभ बनाए गए हैं जिन पर सुंदर नक्काशी की गई है जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा देती है। मंदिर में प्रवेश के लिए पुरुषों को धोती और महिलाओं को सा?ी पहनना अनिवार्य है।

7/ 7 केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए रोजाना हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। मान्यता है कि तिरुअनंतपुरम नाम भगवान के अनंत नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है। केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए रोजाना हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। मान्यता है कि तिरुअनंतपुरम नाम भगवान के अनंत नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है।
केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की विशाल मूर्ति विराजमान है जिसे देखने के लिए रोजाना हजारों भक्त दूर दूर से यहां आते हैं। इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं। मान्यता है कि तिरुअनंतपुरम नाम भगवान के अनंत नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है।

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कब और कैसे जाए-

आप 12 महीने केरल जा सकते है। यहा के तापमान मे ज्यादा फेरबदल नही होता है। गर्मी मे यहा का तापमान थोड़ा ज्यादा होता है करीबन 24 -33 डिग्री सेल्सियस तक। सर्दीयों मे 22-33 डिग्री सेल्सियस तक और वर्षा ऋतु 22-28 डिग्री सेल्सियस। सूती के कपड़े रखे तो बेहतर होगा। टोपी और धूप का चश्मा रखना न भूले। केरल जाने के लिए आपको रेल सेवा आसानी से मिल जाएगी। हवाई जहाज से भी जा सकते है ये ज्यादा खर्चीला नहीं है।

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कैसे पहुंचे

केरल में तीन बड़े एअरपोर्ट है, त्रिवेन्द्रम इंटरनेशनल एअरपोर्ट, कोचीन इंटरनेशनल एअरपोर्ट एवं कालीकट इंटरनेशनल एअरपोर्ट। यह देश के सभी बड़े एअरपोर्ट से जुड़ा हुआ है। साथ ही केरल के सभी बड़े स्टेशन से देश की भारतीय रेल जुड़ी है। केरल का सबसे बड़ा स्टेशन थिरुवनंतपुरम सेंट्रल है। केरल के सभी बड़े स्टेशन से देश की भारतीय रेल जुड़ी है। केरल का सबसे बड़ा स्टेशन थिरुवनंतपुरम सेंट्रल है।

केरल जाने का सबसे अच्छा समय सितम्बर से मार्च होता है, ये पीक सीजन होता है, इस समय यहाँ बहुत भीड़ होती है। इसके बाद अप्रैल से मई ऑफ सीजन होता है, लेकिन फिर लोग यहाँ जाते है, क्यूंकि देश में बहुत गर्मी पड़ती है, लेकिन यहाँ बहुत अधिक गर्मी नहीं होती है। जून से अगस्त मानसून सीजन होता है, बहुत से लोग मानसून का मजा लेने यहाँ जाते है।