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खजुराहो तीर्थ स्थल : विश्व की धरोहर हैं यहां के मंदिर, जानिए इनसे जुड़े रोचक तथ्य व इतिहास

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मध्य प्रदेश अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक सौंदर्यता का धनी राज्य माना जाता है। यहां ऐसे कई सुंदर मनमोहक और अविश्वसनीय स्थान हैं, जिनहें देश ही नहीं विश्वभर में प्रसिद्धी हासिल की है। यहां तीन ऐसे भी स्थल हैं, जिन्हें विश्व स्थ्ल धरोहर कहा जाता है। विश्व की धरोहर का स्थान यूनेस्को ने दिया है। जो विश्व की 981 धरोहरों में से एक है। इन्हीं में से एक है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो में स्थित मंदिरों का समूह, जिन्हें यहां के चंदेल राजाओं द्वारा निर्माण कराया गया था। खजुराहो के मंदिर अपना अलग ही महत्व रखते हैं, ये अपनी तरह के इकलौते मंदिर माने जाते हैं। दरअसल खजुराहो के मंदिर अपनी कामुक और निःवस्त्र मूर्तियों के कारण विश्व प्रसिद्ध है। हर साल लाखों देशी-विदेशी सैलानी इन्हें देखने पहुंचते हैं।

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खजुराहो के मंदिरों का समूह है विश्व धरोहर

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 376 किमी. दर छतरपुर जिले के खजुराहो में स्थित राजाओं द्वारा निर्माण कराए गए मंदिरों की खूबसूरती को किसी परिचय की जरूरत नहीं है। हिन्दू और जैन धर्म के मंदिरों का सबसे बड़ा समूह यहां स्थित है। इन्हें विश्व की सबसे खूबसूरत और सबसे प्रसिद्ध विरासतों में से एक माना जाता है। इन मंदिरों को यूनेस्कों द्वारा विश्व धराहरों की सूची में साल 1986 में शामिल किया गया था। पहले सइे खर्जूरवाहक नाम से जाना जाता था। खजुराहो के ये मंदिर देश के सबसे खूबसूरत मध्ययुगीन स्मारक हैं। यहां स्थित मंदिरों का निर्माण चंदेलशासकों द्वारा 950 से लेकर 1050 ई. के बीच कराया गया है। इन मंदिरों का जटकरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें नागर शैली में बनवाया गया है।

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यदि आप कभी खजुराहो मंदिर को देखने के लिए जायेंगे तो आप वहां पर देखेंगे कि मंदिर की बाह्य दीवारों पर कामुक मूर्तियों को उकेरा गया है। ये सभी मुर्तियां अलग-अलग कामुक मुद्राओं में हैं पर आजतक यह कोई नहीं जान सका है कि मंदिर की बाह्य दीवारों कि मूर्तियों को बनवाने के पीछे आखिर क्या राज था। इसे लेकर यहां के लोगों में कई प्रकार की मान्यताएं हैं, जिनको हम आज आपके सामने रख रहें हैं। आइये जानते हैं इन मान्यताओं को।

क्या है खजुराहो मंदिर का इतिहास

खजुराहो स्मारकों का समूह राजपूत चंदेला साम्राज्य के शासनकाल में बनाया गया है। चंदेला शासन की ताकत का विस्तार होते ही उनके साम्राज्य को बुंदेलखंड का नाम दिया गया और तुरंत खजुराहो स्मारकों का निर्माणकार्य शुरू किया। खजुराहो के बहोत से मंदिर हिन्दू राजा यशोवर्मन और ढंगा के शासनकाल में बने है। यशोवर्मन की महानता को हम लक्ष्मण मंदिर में देख सकते है। विश्वनाथ मंदिर दूसरे शासक ढंगा की महानता को दर्शाता है।

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  • खजुराहो स्मारकों में सबसे प्रसिद्ध मंदिर कंदरिया महादेव मंदिर है जो 1017-1029 ई. में गंडा राजा के शासनकाल में बना हुआ है। और इतिहासकारों के अनुसार खजुराहो स्मारकों में बहोत से मंदिर 970 से 1030 ई. के समय में ही बने है।
  • खजुराहो मंदिर कलिंगर क्षेत्र के चंदेला साम्राज्य की राजधानी महोबा शहर से 35 मील दूर बने है। मध्यकालीन भाग में उनके साम्राज्य को जिझोती, जेजहोती, चिह-ची और जेजाकभुक्ति कहा जाता था।
  • पर्शियन इतिहासकार रिहन-अल-बिरूनी ने महमूद गजनी ने 1022 ई. में कलिंगर पर किये आक्रमण का वर्णन किया है। उसने खजुराहो को जजहुती की राजधानी बताया। गजनी का यह धावा असफल रहा क्योकि हिन्दू राजा महमूद गजनी को फिरौती देने को भी राजी हो गये थे।
  • 12 वी शताब्दी में खजुराहो मंदिर काफी सक्रीय थे। खजुराहो स्मारकों में बदलाव 13 वी शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के आक्रमण के बाद हुआ, सुल्तान कुतुब-उद-दिन ऐबक ने आक्रमण कर के चंदेला साम्राज्य को छीन लिया था। इसकी एक शताब्दी के बाद ही इब्न बतुत्ता, मोरक्कन यात्री तकरीबन 1335 से 1342ई. तक भारत रुका और उसने अपने लेखो में खजुराहो को “कजर्रा” कहते हुए कहा की।

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  • मध्य भारतीय क्षेत्र में खजुराहो मंदिर 13 से 18 वी शताब्दी के बिच मुस्लिम शासको के नियंत्रण में थे। इस काल में बहोत से मंदिरों का अपमान कर उन्हें नष्ट भी किया गया था। उदाहरण के लिये 1495 ई. में सिकंदर लोदी ने अपनी सैन्य शक्ति के बल पर खजुराहो मंदिरों का विनाश किया था। लेकिन बाद में हिन्दुओ और जैन धर्म के लोगो ने एकत्रित होकर खजुराहो मंदिर की सुरक्षा की।
  • लेकिन जैसे-जैसे सदियाँ बदलती गयी वैसे-वैसे वनस्पति और जंगलो का भी विकास होता गया और और खजुराहो के मंदिर भी सुरक्षित हो गये।
  • 1830 में स्थानिक हिन्दुओ ने ब्रिटिश सर्वेक्षक टी.एस. बर्ट को मार्गदर्शित किया। लेकिन बाद में एलेग्जेंडर कन्निंघम ने बताया की खजुराहो मंदिरों का ज्यादातर उपयोग हिन्दू योगी ही करते थे और हजारो हिन्दू और जैन धर्म के लोग शिवरात्रि मनाने फरवरी और मार्च के महीने में हर साल आते थे। 1852 में मैसी ने खजुराहो मंदिरों की कलाकृति भी बनवायी।

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कला और मूर्तिकला

  • इन मंदिरों में सबसे प्राचीन और वर्तमान में प्रसिद्ध कंदारिया महादेव मंदिर की ऊंचाई 107 फिट मानी जाती है। इस मंदिर के अंदर 256 मूर्तियाँ और बाहर 646 मूर्तियों की गणना करी गई है।
  • खजुराहो मंदिरों में कलात्मक कार्य किया गया है जिनमे मंदिर के आंतरिक और बाहरी भागो पर 10 प्रतिशत कामोत्तेजक कलाकृतिया बनायी गयी है। इनमे से कुछ मंदिरों में लंबी दीवारे बनी हुई है जिनमे छोटी लेकिन कामोत्तेजक कलाकृतिया बनी हुई है। कुछ विद्वानों का ऐसा मानना है की प्राचीन सदियों में यहाँ कामुकता का अभ्यास किया जाता था।

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  • जबकि कुछ विद्वानों का ऐसा कहना है की कामुक कलाकृतिया हिन्दू परंपरा का ही एक भाग है और मानवी शरीर के लिये यह बहुत जरुरी है। जेम्स मैककोन्नाचि ने अपने कामसूत्र के इतिहास में खजुराहो का भी वर्णन किया है।

Madhya pradesh tourist destination Chhatarpur Khajuraho

खजुराहो मंदिर की कुछ महत्वपूर्ण और रोचक बातें

1. खजुराहो मंदिर का निर्माण कुंडलीदार जटिल रचना के आकार में किया गया है। खजुराहो मंदिर उत्तर भारतीय शिखर मंदिर के आकार में जुड़े हुए है।

2. खजुराहो मंदिर अपनी आकर्षित कलाकृति और इतिहासिक मूर्तियों के लिये प्रसिद्ध है।

3. खजुराहो मंदिर के अन्दर के कमरे एक दुसरे से जुड़े हुए है। कमरों में एक तरह से कलाकृति की गयी है की कमरों की खिड़कियों से सूरज की रौशनी पुरे मंदिर में फैले। और लोग भी मंदिर को देखते ही आकर्षित होते है।

4. खजुराहो नाम हिंदी शब्द ‘खजूर’ से आया है जिसका अर्थ “खजूर फल” है।

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5. इस मंदिर का निर्माण 950 और 1050ई. में चंदेल साम्राज्य के समय में किया गया था।

6. पहले प्राचीन काल में खजुराहो समूह में कुल 85 मंदिर थे लेकिन प्राकृतिक आपदाओ के कारण बहुत से मंदिर अब नष्ट हो चुके है। अब खजुराहो में केवल 22 हिन्दू मंदिर ही बचे हुए है।

7. 20 वी शताब्दी में ही खजुराहो मंदिरों को पुन:खोजा गया था।

8. यह मानना गलत होगा की खजुराहो मंदिर केवल कामुक कलाकृतियों के लिये ही प्रसिद्ध है। बल्कि ये कामुक कलाकृतिया प्राचीन भारत की परंपराओ और कलाओ का प्रतिनिधित्व करती है।

9. खजुराहो मंदिर में मध्यकालीन महिलाओ के जीवन को पारंपरिक तरीके से चित्रित किया हुआ है।

10. हजारो श्रद्धालु और यात्री खजुराहो मंदिर देखने आते है। खजुराहो मंदिर मध्य भारत के हृदय मध्य प्रदेश के दायी तरफ स्थित है।

खजुराहो मंदिर समूह के कुछ विशेष मंदिर

सामान्य रूप से खजुराहो मंदिर समूह के सभी मंदिर दर्शनीय हैं, लेकिन निम्न मंदिर सबसे पहले देखने योग्य माने जाते हैं-

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विश्वनाथ मंदिर : ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर पुष्कर के अलावा खजुराहो में भी आपको मिल जाएगा। तीन सिर वाले ब्रह्मा जी की मूर्ति के अलावा इस मंदिर के उत्तरी दिशा में शेर और दक्षिणी दिशा में हाथी की मूर्तियाँ भी आकर्षण का केंद्र मानी जाती हैं।

चित्रगुप्त मंदिर : यमदेव के मुंशी रूप में प्रसिद्ध भगवान चित्रगुप्त जी के मंदिर बनारस के अलावा आपको खजुराहो के मंदिर समूह में भी मिल जाएँगे। इस मंदिर में भगवान सूर्य की सात घोड़ों वाली रथ पर 5 फुट ऊंची मूर्ति अपने आप में पूरा आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा इस मंदिर की दीवारों पर राजाओं के शिकार और राजसभाओं में होने वाले समूहिक नृत्य के चित्र देखते ही बनते हैं।

लक्ष्मण मंदिर : इस मंदिर में मुख्य मूर्ति के रूप में भगवान विष्णु की मूर्ति है जो पूरी तरह से जीवंत है। इस मंदिर के द्वार पर त्रिमूर्ति के रूप में प्रसिद्ध ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अलावा विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति भी दर्शनीय है। विष्णु जी के तीन अवतारों, उनके मुख्य रूप के अलावा नरसिंहा और वराह रूपों की मूर्ति भी स्थापित है।

आदिनाथ मंदिर : यह मंदिर जैन धर्म के प्रवर्तक पहले तीर्थंकर ऋषभ देव को समर्पित है जहां दीवारों पर यक्ष-यक्षिणी की मुद्राओं को उकेरा गया है।

चतुर्भुज मंदिर : खजुराहो के मंदिर समूहों में दक्षिणी भाग में स्थित इस मंदिर में विष्णु भगवान की बड़ी कलात्मक मूर्तियाँ स्थापित करी गई हैं।

समय की गर्त में खो गए खजुराहो के मंदिरों की खोज 1838 में ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन टी एस बर्ट ने करी थी। इसके बाद इन मंदिरों की देखभाल पर समय और धन व्यय करा गया। परिणामस्वरूप 1986 में यूनेस्को ने खजुराहो के मंदिरों को विश्व धरोहर स्थल का स्थान दिया गया है। इस प्रकार एक छोटा सा गाँव विश्व की प्रसिद्ध धरोहर का संरक्षक बन गया है।

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इस तरह आसान होगा खजुराहो का सफर

विश्व प्रसिद्ध स्थल मध्य प्रदेश में स्थित है।, जिसकी राजधानी भोपाल से दूरी 376 किमी. है। लेकिन इस मनमोहक धार्मिक स्थल तक मध्य प्रदेश या देश से बाहर के लोग उत्तर प्रदेश के रास्ते झांसी शहर से जाना आसान होगा। झांसी से खजुराहो की दूरी ट्रेन से 175 किमी. है, लेकिन आप यहां से वाया रोड भी जा सकते हैं इसके लिए आपको टे्रवल या टूरिज्म बस की सहायता लेनी होगी। पहले आप छतरपुर जाएंगे वहां से खजुराहो। अगर आप ट्रेन के माध्यम से जाते हैं, तो खजुराहो रेलवे स्टेशन से आपको प्राइवेट टैक्सी या सिटी बस की मदद लेनी होगी। वो आपको इन दर्शन स्थलों तक पहुंचा देंगे।