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नैनीताल- हाई कोर्ट का फैसला, सरोवर नगरी में ऑल इंडिया टैक्सी परमिट हुआ बैन

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All India Permit Taxi Banned in Nainital, पर्यटकों की सुविधा और सरोवर नगरी की सुदंरता कायम रखने के लिए हाई कोर्ट ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए है। जिसके चलते नैनीताल में ट्रैफिक से लेकर अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन को ऐक्शन में आने ने निर्देश कोर्ट द्वारा दिए गए है। आइआइटी दिल्ली की सलाह लेने व अवैध रूप से भवनों का निर्माण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के ताजा आदेश से शहरवासियों में खलबली मचना तय है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि टैक्सियों का ऑल इंडिया परमिट नैनीताल में मान्य नहीं होगा (All India Permit Taxi Banned in Nainital)। इस आदेश से टैक्सी संचालकों में भी हड़कंप मच गया है।

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वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांधु धूलिया व न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने नैनीताल के प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रो. अजय रावत की जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कोर्ट कमिश्नर अनिल जोशी को छूट दी है कि आदेश की अवहेलना होने पर कोर्ट को अवगत करा सकते हैं। कोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिए कि आदेश की एक कॉपी डीएम नैनीताल को आवश्यक कार्रवाई के लिए उपलब्ध कराएं।

इन वाहनों की नहीं नैनीताल में एंट्री

हाई कोर्ट ने शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने व यातायात नियंत्रित करने के लिए शहर में 25 सीटर से अधिक क्षमता वाले वाहन को एंट्री न देने, शहर से बाहर छोटे होटल खोलने, होम स्टे योजना लागू करने, शहर के बाहर पार्किग बनाने, माल रोड में आपातकालीन सेवा छोड़ अन्य भारी वाहनों को प्रतिबंधित करने, अपर माल रोड में पर्यटन सीजन में सायं छह से रात नौ बजे तक व ऑफ सीजन में शाम छह से आठ बजे तक यातायात बंद रखने को कहा है। इसके अलावा नैनी झील में सीवर की गंदगी जाने से रोकने के लिए कड़े कदम उठाने, घोड़ों की लीद झील में न जाने देने तथा नालों पर मलबा न फेंकने, पेड़ों के अवैध कटान को गंभीर अपराध मानते हुए कार्रवाई करने के आदेश पारित किए हैं।

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कर सकतें है ईको-सेंसेटिव जोन घोषित

शहर में अवैध निर्माणों के संबंध में कोर्ट ने सचिव आपदा प्रबंधन को अवैध निर्माण रोकने व इसके जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं। सूखाताल व संवेदनशील पहाडि़यों में हो रहे अवैध निर्माण ध्वस्त करने का सख्त आदेश मंडलायुक्त व डीएम तथा प्राधिकरण सचिव को दिए हैं। साथ ही सुरक्षित स्थानों पर आवासीय मकान बनाने की छूट भी कोर्ट ने दी है। कोर्ट ने आदेश में कहा है कि वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ कमेटी की ईको-सेंसेटिव जोन की संस्तुति करने संबंधी निर्देश मंत्रालय दे सकता है। याचिका में इसकी मांग की गई थी। कमेटी ने यह संस्तुति 2003 में की थी।