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कविता-मेरी मिट्टी, मेरी जान

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उत्तराखंड के लोकप्रिय वेब पोर्टल न्यूज टुडे नेटवर्क की ओर से स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में आॅनलाइन कविता प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। इसमें बालए युवा और वरिष्ठ सभी वर्गों के लोग प्रतिभाग कर सकते हैं। प्रतियोगिता में ष्मेरे प्यारे वतनष् विषय पर देशभक्ति से ओत.प्रोत स्वरचित कविता लिखकर 20 अगस्त तक भेजनी है। इसके तहत गुरु दोणा पब्लिक स्कूल, हल्द्वानी की होनहार छात्रा ममता परगाई की शानदार कविता पढ़िए-


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जिस माँ का दूध पिया,
उसकी बाहों को आज तरसता छोड आया हूं,
मै वापस आऊँगा कहकर उम्मीदें दिखा कर आया हूं,
अगर ना आऊं मैं वापस तो धोखेबाज का नाम ना दे देना,
क्योंकि इस मिट्टी के भविष्य के लिए मैं अपना आज कुर्बान कर आया हूं।
मेरी मौत पर मेरी माँ मातम नहीं,
गर्व से जश्न मनाएगी।

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ये भी पढ़ें… तुझसे ही होती हर पल मेरी पहचान है

क्योंकि जन्म लेकर मैं उसकी कोख को धन्य कर आया हूं,
आंखों से काजल, होठों की मुस्कान मैं चुरा आया हूं,
पहले वही मेरा दीदार करेगी उससे ये कह कर आया हूं।
पर आज कैसे करेगी वो पगली दीदार मेरा,
लाश के नाम पर मैं तो चिथड़ों में आया हूं।

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