होम स्टे योजना की पंजीकरण प्रक्रिया जाने, कैसे आवेदक को 30 दिन में मिलेगी अनुमति

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उत्तराखण्ड गृह आवास (होम स्टे) की पंजीकरण प्रक्रिया क्या है।
राज्य भर में पर्यटन व्यवसाय से जुडऩे वाले स्थानीय लोगों के लिए उत्तराखण्ड सरकार की उत्तराखण्ड गृह आवास (होम स्टे योजना) वरदान साबित हो रही है। आज हम इस योजना में पंजीकरण की प्रक्रिया एवं शर्तें, शुल्क कहाँ, कैसे और ध्यान रखने योग्य बातों की जानकारी दे रहे हैं।
होम स्टे योजना में पंजीकरण हेतु प्रक्रिया
1- होम स्टे योजना में पंजीकरण के लिए भवन स्वामी हेतु अपने कक्षों को निर्धारित करने के बाद पांच सौ रूपये पंजीकरण का शुल्क अपने जिले के क्षेत्रिय या फिर जिला पर्यटन विकास अधिकारी के कार्यालय में शुल्क जमा करेंगे।
2- यह शुल्क मुख्य कार्यकारी अधिकारी, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास परिषद देहरादून के नाम बैंक ड्राफ्ट देना होगा।
3- ऐसी आवासीय ईकाईयों को पंजीकृत किया जायेगा जिसमें भवन स्वामी खुद निवास करता हो।
4- होम स्टे मे करीब छह कमरों की व्यवस्था करनी होगी जिसमें प्रत्येक कमरें में टू बैड या फिर एक कमरें में चार बैड से ज्यादा बैड न हो को स्वीकृति दी जायेगी।
5- विभाग द्वारा शौचालय, जल, विद्युत एवं आवश्यक उपकरणों के आधार पर कुल 27 मानकों को तय करने के आधार पर आवास गृह को गोल्ड, सिल्वर और ब्रान्ज कैटेगरी में बांटा जायेगा। इसकी लिस्ट आपको इन्हीं नीचे दिये गये फोटों के आधार पर आवेदक तय कर सकता है।

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6- आवास गृह या होम स्टे को हमेशा साफ सुथरा व अग्निशमन सुरक्षा उपकरणों से लैस करना होगा
7- होम स्टे की पार्किंग के लिए शहरी क्षेत्रों के मानक जिला विकास प्रधिकरण के द्वारा निर्धारित नक्शा स्वीकृत आधार पर देनी होगी जबकि ग्रामीण क्षेत्र य फिर जिन इलाकों में प्रधिकरण का दायरा नही है उन इलाकों में आवास गृह के मालिक या आवेदक की इच्छा पर पार्किंग निर्धारित है।

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8- होम स्टे योजना में शौचालय की सफाई तथा जैविक अजैविक कूड़ा का निस्तारण भवन स्वामी को खुद करना होगा।
9- सरकार द्वारा पर्यटन अधिकारी के नेतृत्व वाली समिति होम स्टे का निरीक्षण करेगी और यदि कोई कमी होगी तो उसके निराकरण के लिए पत्र देगी। अगर समिति द्वारा दिये गये निर्देशों पर कमियों को दूर नही किया जायेगा तो आवेदन को निरस्त कर दिया जायेगा।
10 – अच्छी बात रहेगी जिसमें आवेदक को 30 दिन के भीतर क्षेत्रिय या जिला पर्यटन विकास अधिकारी से पंजीकरण या फिर निरस्तीकरण की पूर्ण रिपोर्ट भेजी जायेगी।
साथ ही सरकार की नियमावली में समय समय पर परिर्वतन के आधार पर भवन स्वामी को परिवर्तन करना होगा।

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