कैलाश मानसरोवर यात्रा में अब नहीं पार करने होगें ये दो पैदल पड़ाव, सरकार के इस काम से हुआ ये फायदा

121

कैलास मानसरोवर की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए एक अच्छी खबर है। अब गर्वाधार से चीन सीमा तक बन रही सड़क पर नजंग तक वाहन चलने लगे हैं। बता दें गर्बाधार से चीन सीमा लिपूलेख तक बन रही सड़क पर सबसे बड़ी बाधा लखनपुर से नजंग के बीच तीन किमी हिस्से की रही है। बीते वर्ष इस स्थान पर सड़क निर्माण के दौरान हुए भारी भूस्खलन से कैलास मानसरोवर यात्रा का संचालन पिथौरागढ़ से गुंजी तक हेलीकॉप्टर से करना पड़ा था। माईग्र्रेशन करने वाले ग्रामीणों के लिए लखनपुर और नजंग के पास काली नदी में नेपाल की सहमति से दो अस्थाई पुल बनाकर आवाजाही करनी पड़ी थी। इस वर्ष यह बाधा दूर हो चुकी है। बीआरओ ने लखनपुर से नजंग के मध्य सड़क बनाते हुए अजेय माने जाने वाले नजंग पर पुल का निर्माण कर दिया है। जिसके बाद अगले माह से प्रारंभ हो रही कैलास मानसरोवर यात्रा में यात्री अब पहली बार नजंग तक वाहन से यात्रा कर सकेंगे।

kailash mansarovar yatra

दो पैदल पड़ाव हुए कम

वही बीआरओ प्रभारी की माने तो नजंग से मालपा के बीच सड़क निर्माण का कार्य किया जा रहा है। कुछ मीटर सड़क कट चुकी है। जबकि लामारी से बूंदी तक सड़क कटान का कार्य तेजी से है। उच्च हिमालय में छियालेख से लेकर नाबीढांग तक सड़क तैयार है। नजंग तक सड़क तैयार होने और मोटर पुल बनने से कैलास मानसरोवर यात्रा आधार शिविर धारचूला से नजंग तक वाहन से जाएगी। नजंग के पास से पैदल यात्रा प्रारंभ होगी। पहले दिन यात्री पैदल चलकर नजंग से बूंदी पहुंचेंगे। बता दें कि अभी तक यात्रा धारचूला से 54 किमी दूर श्रीनारायण आश्रम तक वाहन से जाती थी। नारायण आश्रम से पैदल यात्रा प्रारंभ होती थी। पहला पैदल पड़ाव सिर्खा और दूसरा पैदल पड़ाव गाला होता था। बूंदी तीसरा पैदल पड़ाव रहता था। इस बार बूंदी पहला पैदल पड़ाव होगा। पूर्व में बूंदी पहुंचने के लिए तीसरे दिन यात्रियों को 17 किमी पैदल चलना पड़ता था। इस बार यह दूरी काफी कम हो जाएगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here