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हल्द्वानी- उत्तराखंड पैराग्लाईडिंग पॉलिसी में हुआ ये बदलाव, आवेदक रखें इन नियमों का खास ध्यान

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Uttarakhand Paragliding Policy 2019, उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार निरंतर नये कार्य कर रही है। फिर चाहे सैलानियों के आराम की बात हो या उनकी सुरक्षा की सरकार हर पहलू का बराबर ध्यान रख रही है। बता दें कि उत्तराखंड में पर्यटन से पहाड़ी इलाको में रहने वाले लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है। ऐसे में पर्यटन संबंधी किसी भी कार्य को करने के लिए कई नियम सरकार ने तय किये है। ऐसा भविष्य में किसी तरह की समस्या से बचने के लिहाजा से किया गया है।

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अक्सर पहाड़ो में घूमने आये सैलानी एयरो स्‍पोटर्स जैसे पैराग्लाइडिंग में बेहद रुची रखते है। जो उनको एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। लेकिन इस तरह का एयरों स्‍पोटर्स जितना रोमांचक नजर आता है, उतना ही खतरनाक भी है। जिसको देखते हुए सरकार ने इस तरह के एयरो स्‍पोटर्स को आपरेट करने वालें एक्सपर्ट के लिए कई महत्वपूर्ण नियम तय किये है। जिससे की इस स्‍पोटर्स को सुरक्षित ढंग से किया जा सके।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लिया महत्वपूर्ण फैसला

दरअसल कैबिनेट ने राज्य में पैराग्लाइडिंग समेत एयरो स्‍पोटर्स की असीम संभावनाओं को देखते हुए पहली बार उत्तराखंड फुट लांच एयरो स्‍पोटर्स, पैराग्लाइडिंग नियमावली को मंजूरी दी थी। इसके तहत केंद्र की गाइडलाइन के अनुसार पैराग्लाइडिंग संचालकों, पायलट और इंस्ट्रक्टर्स की योग्यता का निर्धारण, साहसिक गतिविधियों के नियंत्रण और जांच के लिए तकनीकी समिति व नियामक समिति गठित की गई हैं। लेकिन इस नियमवाली में समिति द्वारा कुछ बिंदुओ में संशोधन की मांग की गई। जिस पर एक बार फिर मोहर लग गई है।

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नियमों में हुआ ये बदलाव

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अधिनियम 2001 के तहत उत्तराखंड फुट लॉच एयरो स्पोर्ट (पैराग्लाइडिंग) प्रदेश में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार का एक सराहनीय कदम है। जिसके लिए अगस्त 2018 में फुट लांच एंड एरो स्पो‌र्ट्स (पैराग्लाइडिंग) नीति लागू की गई। जिसमें संशोधन के बाद पैराग्लाइडिंग के लाइसेंस को आवेदन करने वालों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता पहले हाईस्कूल पास रखी गई थी, जिसे अब इंटरमीडिएट किया गया है।

मुख्य प्रशिक्षक के लिए तय की गई अवधि को अब समय यानी 50 घंटे के स्थान पर 50 हवाई किमी कर दिया गया है। इसके अलावा टेंडेम पायलट को कम से कम 100 घंटो की उड़ान का अनुभव होना अनिवार्य है। इसके अलावा इस तरह के स्पोर्ट को शुरु करने के लिए आवेदक के पास न्यूनतम 200 घंटो जबकि मास्टर अनुदेशक के लिए 400 घंटो का उड़ान अनुभव हो। इसके साथ ही पैराग्लाइडिंग समेत अन्य एयरोस्पोटर्स गतिविधियों के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा का भी विशेष ख्याल रखा जाएगा। पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी करने पर दंड का प्रावधान भी नियमावली में किया गया है।

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नियमावली में ये भी प्रावधान

-टेंडम पायलट बनाने को न्यूनतम 100 घंटे की उड़ान का अनुभव आवश्यक।

-मुख्य प्रशिक्षक के लिए 200 घंटे की उड़ान और एक समय पर 50 किमी लंबी उड़ान का अनुभव व पैराग्लाइडिंग सेफ्ट में ट्रेंड होना जरूरी।

-पैराग्लाइडिंग गतिविधियों को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर नए मानकों का होगा समावेश।

-पैराग्लाइडिंग को ड्रेस, सुरक्षा उपकरण, आयु सीमा के मानकों का निर्धारण।

-पैराग्लाइडिंग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति का बीमा कराएंगे ऑपरेटर।

-आवेदक को हर वर्ष 16 जुलाई से 30 अगस्त के बीच सरकार को चुकाना होगा 1000 रुपए शुल्क।

-गंभीर रोगों से ग्रसित व्यक्ति नहीं उठा सकेंगे पैराग्लाइजडिंग का लुफ्त।