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देहरादून- चौलाई, काले भट्ट जैसे उत्पादों को मिलेगा उचित दाम, ऐसे मदद करेगा कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड

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देवभूमि में पलायन का दंश झेल रहे गांवों में खेत अब वीरान नहीं रहेंगे, बल्कि इनमें फसलें लहलहाएंगी। जी हां आप एकदम सही पढ़ रहे है। खेती-किसानी की तस्वीर संवारने के मकसद से राज्य सरकार एक गांव-एक खेत की अवधारणा को धरातल पर उतारने जा रही है। इसमें अधिकांश पर्वतीय इलाकों पर विशेष फोकस रहेगा। योजना के तहत गांव के सभी खेतों को एक मानते हुए उनमें सामूहिक रूप से खेती की जाएगी।

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ऐसे काम करेगा कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड

हाल ही में इसके लिए त्रिवेंद्र सरकार ने पारंपरिक फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य और मार्केटिंग के लिए 10 करोड़ का रिवाल्विंग फंड को मंजूरी देकर प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत दी है। इससे किसानों को फसलों का उचित दाम मिलेगा। प्रदेश के करीब 10 लाख किसानों को इसका लाभ मिलेगा। इसके लिए मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। सरकार ने पहले चरण में मंडुवा, झंगोरा, चौलाई, गहत, काला भट्ट, राजमा का एमएसपी तय किया है। अभी तक इन फसलों का एमएसपी तय न होने से किसानों को उचित दाम नहीं मिलते हैं। उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड सीधे किसानों से फसलें खरीदेगा और प्रोसेसिंग कर आगे बेचेगा। मार्केटिंग के लिए बिचौलियों से छुटकारा मिलेगा।

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उत्पादों के दाम हुए तय

पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादन में झंगोरा 1950 रुपये प्रति क्विंटल, चौलाई 2935 रुपये, काला भट्ट 3468 रुपये, गहत 7725 रुपये और राजमा 7920 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया। शीतकालीन सत्र में उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी (विकास एवं विनियमन) (संशोधन) विधेयक-2019 पारित कर दिया गया। मंडी बोर्ड में गठित होने वाले रिवाल्विंग फंड में मंडी समितियां 10 प्रतिशत तक धनराशि जमा करा सकेंगी। उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड अब किसानों से उत्पाद खरीदेगी। इसके लिए 10 करोड़ का रिवाल्विंग फंड (चक्रीय निधि) बनाया जाएगा। मंडी समितियां किसानों से उत्पाद खरीदने करने के बाद प्रोसेसिंग कर आगे बेचेगी। उत्पाद खरीदने के लिए परिषद रिवाल्विंग फंड तैयार करेगी।

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किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

विधेयक के अधिनियम बनने के बाद किसानों को सीधे तौर पर लाभ होगा। यदि खुले बाजार में उन्हें वाजिब दाम नहीं मिले तो वे मंडी समितियों में अपने कृषि उत्पाद बेच सकेंगे और इनका उन्हें बेहतर दाम मिलेगा। मंडी समिति को उत्पाद बेचने पर मंडी बोर्ड सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान करेगा। ऐसे में सरकार का ये कदम किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में मददगार साबित होगा। आने वाले समय में सरकार के इस फैसले से कृषि क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।