drishti haldwani

दुनियां के पर्यटन स्थलों में से सबसे बेहतरीन पर्यटन स्थल है उत्तराखंड, जानिए क्या है यहां खास…

226

देहरादून-न्यूज टुडे नेटवर्क। उत्तराखंड भारत के उत्तर में पहाड़ी राज्य है, जो पहले उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था। दून वैली पर बसा देहरादून उत्तराखंड की राजधानी है, जो चारों ओर से प्राकृतिक दृश्यों से घिरा हुआ है। यह राज्य भौगोलिक तौर पर मुख्यत: दो हिस्सों गढ़वाल और कुमाऊं में बंटा हुआ है। यह राज्य अपने प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों, घने जंगलों, ग्लेशियरों और बर्फ से ढंकी चोटियों के लिए जाना जाता है। जब भी भारत में कहीं पर्यटन स्थलों का जिक्र होता हैं तो सबसे पहले उत्तराखंड का नाम आता हैं क्योकि घूमने फिरने के लिए उत्तराखंड बेहतर पर्यटन स्थल हैं। इसलिए तो उत्तराखंड को ईश्वर की धरती या देवभूमि के नाम से जाना जाता है। हिंदुओं की आस्था के प्रतीक चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यहीं स्थित हैं। उत्तर का यह राज्य गंगा और यमुना समेत देश की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल भी है। उत्तराखंड, वैली ऑफ फ्लॉवर (फूलों की घाटी) का भी घर है, जिसे यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में शामिल किया है।

iimt haldwani

images (2)

उत्तराखंड के पर्यटन स्थल

नैनीताल, उत्तर-काशी, मसूरी और चमौली जैसे उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख हिल स्टेशन उत्तराखंड में ही हैं। हरे-भरे और घने जंगल इसे 12 नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ अभ्यारण्यों के लिए आदर्श स्थान बनाते हैं। हिल स्टेशनों की सुरम्यता के साथ-साथ धार्मिक महत्व के स्थान होने के कारण देश और दुनियाभर के लोग यहां आते हैं। उत्तराखंड ट्रैकिंग, क्लाइंबिंग और वाटर राफ्टिंग जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स का केंद्र भी है और इस कारण युवाओं की पहली पसंद है।

gmvn-auli-53

उत्तराखंड के हिल स्टेशन

उत्तराखंड अपने हिल स्टेशनों मसूरी, चोपटा, अल्मोड़ा, नैनीताल, धनौल्टी, लैंसडाउन, वैली ऑफ फ्लॉवर और सत्तल के लिए प्रसिद्ध है। ये भारत के कुछ अनुपम हिल स्टेशन हैं, जो हरियाली से ओतप्रोत, बर्फ की चादर ओढ़े चोटियों और रंगबिरंगे फूलों से भरे हैं। वैली ऑफ फ्लॉवर में तो 250 प्रकार के फूलों की प्रजातियां हैं जो आंखों को सुकून देते हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून अंग्रेजों के शासनकाल से ही सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन है। यह प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल और भारत के सबसे पुराने शहरों में से एक है। मसूरी अपनी हरी-भरी पहाडय़िों और विविध वनस्पतियों और जीवों के लिए जानी जाती है। आप इस शहर से हिमालय की बर्फ से ढंकी लंबी पर्वतमाला के विहंगम दृश्य देख सकते हैं। इनके अलावा नैनीताल भी अपनेआप में ऐसी ही खूबसूरती समेटे हुए है और आप यहां भी यादगार पर्यटन के लिए जा सकते हैं।

वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यान

इस रा’य में विभिन्न वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य और पार्क पाए जाते हैं। देहरादून जिले में मशहूर आसन बैराज भी है, जहां यमुना और आसन का संगम है। कस्तूरी मृग के संरक्षण के लिए स्थापित एस्काट कस्तूरी मृग अभयारण्य भी यहीं है। तेंदुआ, हिरण, भालू, जंगली बिल्ली, उदबिलाव जैसे कई जंगली जानवर यहां बहुलता से पाए जाते हैं। नैनीताल जिले के रामनगर मेंं सबसे बड़ा और पुराना नेशनल पार्क ‘जिम कार्बेट नेशनल पार्क’ स्थित है। यह पार्क विभिन्न जंगली जानवरों के अलावा बाघों के लिए जाना जाता है। भारत सरकार यहां प्रोजेक्ट टाइगर अभियान चला रही है। उत्तरकाशी जिले में गोविंद वाइल्डलाइफ अभ्यारण्य लुप्तप्राय: जानवरों के लिए महत्वपूर्ण स्थान और शरणस्थली है। यहां आयुर्वेदिक से लेकर एलोपैथिक दवाओं से जुड़े पौधे और वनस्पतियां मिलती हैं। बर्फीला तेंदुआ भी यहां देखा जा सकता है।

download

उत्तराखंड के धार्मिक स्थल

भगवान शिव के और अनेक पवित्र मंदिरों के कारण उत्तराखंड हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थानों में गिना जाता है। बद्रीनाथ और केदारनाथ, दो ऐसे तीर्थस्थल हैं, जो यहां सदियों पहले से हैं। बद्रीनाथ चार धामों में से एक है और सबसे पवित्र स्थलों में से है। केदारनाथ भी बद्रीनाथ जितना ही पवित्र और दर्शनीय स्थल है। यहां प्राचीन शिव मंदिर है, जहां 12 ’योर्तिलिंग में से एक शिवलिंग विराजमान हैं। गंगोत्री धरती का वह स्थान है, जिसे माना जाता है कि गंगा ने सबसे पहले छुआ। देवी गंगा यहां एक नदी के रूप में आई थीं। यमुनोत्री यमुना नदी का स्रोत है और इसके पश्चिम में पवित्र मंदिर है। हरिद्वार गंगा नदी के तट पर स्थित है। यह हिंदुओं का प्राचीन तीर्थस्थल है। ऋषिकेश सभी पवित्र स्थानों के लिए प्रवेश द्वार है।

घूमने के लिए सलाह

अगर आप उत्तराखंड घूमने जाना चाहते हैं तो आप गर्मियों के दिनों में जाए क्योकि गर्मियों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। इसलिए आप यहां गर्मियों में जाए क्योकि सर्दियों में यहां बहुत ठंड होती हैं। उत्तराखंड में घूमने का सर्वश्रेष्ठ समय मार्च से जून के बीच और सितंबर-अक्टूबर का महीना होता है। ट्रैकिंग या अन्य किसी कारण से, बाहर निकलें तो अपने साथ एक नक्शा रखें। यह पहाड़ी क्षेत्र है। आमतौर पर शाम के बाद बहुत ठंडक हो जाती है। गर्म कपड़े हमेशा साथ रखें। बरसात के मौसम में पहाडय़िों में यात्रा करने से बचें। इस मौसम में भूस्खलन का खतरा होता है।

nainiatal

यात्रा के दौरान खर्च

उत्तराखंड, देश के उन प्रमुख राज्यों में हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग घूमने जाते हैं। लोगों के यहां आने की अनेक वजहें हैं, जैसे एडवेंचर स्पोर्ट्स, तीर्थयात्रा, प्रकृतिप्रेम, वाइल्डलाइफ का रोमांच और स्वास्थ्य लाभ लेना। आप अपनी सुविधा और पसंद के मुताबिक टूर पैकेज का विकल्प चुन सकते हैं। टूर पैकेज उत्तराखंड टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड (यूटीडीबी) और अनेक निजी ऑपरेटरों द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। चार धाम पैकेज पर प्रति व्यक्ति करीब 10,000 रुपए का खर्च आ सकता है। दो धाम का खर्च भी करीब 8,500 रुपए तक लग सकता है।

images (5)

लोकप्रिय स्थान

उत्तराखंड खूबसूरत पर्यटन स्थलों के अलावा कई दिलचस्प गतिविधियों का केंद्र भी है। इनमें औली में स्कीइंग की सुविधा, उत्तराखंड में कैंप लगाना, हेमकुंड साहिब में ट्रैकिंग, वैली ऑफ फ्लॉवर्स, ऋषिकेश में राफ्टिंग, माउंटेनिंग, रॉक क्लाइंबिंग, बर्ड वाचिंग, पैराग्लाइडिंग, वाइल्डलाइफ सफारी और गंगोत्री ग्लेशियर में ट्रैकिंग शामिल हैं।

क्या खाएं

उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों क्षेत्रों के अलग-अलग खाद्य पदार्थों की बड़ी विविधता है, जो आपको अपना मुरीद बना लेगी। उत्तराखंड में स्थानीय साग-पत्ते और मसाले का मिश्रण खाने का स्वाद और बढ़ा देते हैं। आप यहां के खाने के लिए पारंपरिक स्वाद वाले भोजन भी चुन सकते हैं, जैसे मठरी और तिल लड्डू, मडुआ रोटी, दुबके के साथ चोलाई रोटी, गहत सूप, गहत रास्मी बड़ी (कोफ्ता), उड़द के पकौड़े (वडा), भांगजीरा की चटनी, आलू के गुटके,तिल की चटनी, बाल मिठाई, सिंगोडी, सिनसुक साग, झिंगारा की खीर, कापा की दाल और सिंघल। पारंपरिक के साथ-साथ देश-विदेश की रसोई में बनने वाला भोजन भी विभिन्न होटलों में उपलब्ध रहता है।

kumaoni_

कैसे पहुंचें

वायु मार्ग से

राज्य का सबसे महत्वपूर्ण हवाई अड्डा देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है। यहां से दिल्ली के लिए नियमित उड़ानें हैं। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र में पंतनगर एयरपोर्ट है, जहां घरेलू विमान सेवाएं उपलब्ध हैं।

shimla-toy-train-1

रेल मार्ग से

रा’य में सिर्फ &45 किमी. रेलवे ट्रैक है। नैनीताल से &5 किमी. दूर काठगोदाम रेलवे स्टेशन है, जो उत्तर-पूर्वी रेलवे का करीब-करीब अंतिम स्टेशन है। यह नैनीताल को देहरादून, दिल्ली और हावड़ा से जोड़ता है। रा’य के पंतनगर, लालकुआं और हल्द्वानी में भी रेल सुविधा उपलब्ध है। देहरादून और हरिद्वार रा’य के दो प्रमुख स्टेशन हैं, जो देश के अधिकतर शहरों और हिस्से से जुड़े हुए हैं। ऋषिकेश, रामनगर और कोटद्वार में भी रेल सुविधा उपलब्ध है।

बस मार्ग से

रा’य में सडक़ों का जाल अ‘छी तरह फैला हुआ है। यहां 28,508 किमी. सडक़ों का जाल है। इसमें से 1,&28 किमी. सडक़ नेशनल हाइवे और 1,54& किमी. स्टेट हाइवे के अंतर्गत आता है। सडक़ मार्ग के लिए उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन बसें चलाता है। निजी ऑपरेटर भी बस, टैक्सी जैसी सुविधाएं देते हैं। रा’य के हर प्रमुख स्थान तक सडक़ मार्ग से पहुंचा जा सकता है।