अमेठी से डरकर केरल क्यों भागे राहुल गांधी, जानिए आखिर इस डर का कारण क्या है ?

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अमेठी-न्यूज टुडे नेटवर्क। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो जगह से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। राहुल ने अमेठी के साथ ही केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और एके एंटोनी ने कहा कि राहुल गांधी अमेठी के साथ ही वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी ने केरल और तमिलनाडु के कार्यकर्ताओं की मांग पर वायनाड से चुनाव लडऩे का फैसला किया है। उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृतियों के संगम के रूप में पार्टी और राहुल ने केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लडऩे का निर्णय लिया। इस सीट पर राहुल का मुकाबला माकपा के पीपी सुनीर से होगा।

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इस डर के कई कारण हैं


पहला कारण : राहुल गांधी 2004 से अमेठी के लोक सभा एमपी हैं। 2004 और 2009 के चुनाव में राहुल गांधी भारी मतों से जीते लेकिन 2014 का लोक सभा चुनाव राहुल गाँधी जीते जरूर लेकिन इस चुनाव में स्मृति ईरानी ने ऐसा कड़ा टक्कर दिया कि विक्ट्री मार्जिन काफी घट गया जबकि स्मृति ईरानी के लिए अमेठी एक नई जगह थी फिर भी अपनी मेहनत से चुनावी माहौल को ऐसे बदला कि जीत हार का फासला महज एक लाख तक सिमट के रह गया डर की शुरुआत वहीं से देखा जा सकता है।

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दूसरा कारण : केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी चुनाव तो हार गयीं लेकिन उन्होंने अमेठी में एक तरह से अपना घर ही बसा लिया और पिछले पांच साल में शायद ही कोई महीना बीता होगा, जब स्मृति ईरानी अमेठी में ना रही हों। वाजिब है कि स्मृति ईरानी स्वयं एक केंद्रीय मंत्री हैं साथ ही लखनऊ और दिल्ली दोनों में उनकी सरकार है जिससे कोई भी कार्य सम्पन्न करने में देर नहीं होती और राहुल गांधी इस वजह से अपने को अपने ही अमेठी में असुरक्षित महसूस करने लगे हैं।

तीसरा कारण : इसमें कोई संदेह नहीं कि अमेठी का गांधी परिवार से वर्षों पुराना रिश्ता रहा है लेकिन ये भी सच है कि 1977 और 1998 में अमेठी में कांग्रेस की हार हो चुकी है। और राहुल गांधी इस सच को अच्छी तरह जानते हैं। इसका मतलब यही हुआ कि अमेठी अभेद्य नहीं है और 1977 एवं 1998 फिर से दुहराया जा सकता है।

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क्या है लोगों का कहना

अमेठी के जानकारों का कहना है कि इस बार अमेठी की हवा का रंग कुछ अलग ही दिखाई दे रहा है। इस रंग के बदलाव का अर्थ क्या है ये तो भविष्य के गर्भ में छिपा है जो समय आने पर ही पता चलेगा। शायद कांग्रेस और राहुल गांधी के लिए भय का एक कारण ये भी हो सकता है। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी के मन में कहीं न कहीं अमेठी को लेकर डर तो जरूर है कि कहीं परिणाम विपरीत न हो जाय. इसी वजह से कांग्रेस पार्टी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती और राहुल गाँधी को दो जगह से चुनाव लड़वाना चाहती है।