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क्यों नहीं पूजे जाते हैं ब्रह्मा जी जानिए, किसने दिया उन्हें इतना बड़ा शाप?

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नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : भारत में सभी देवी-देवताओं के मंदिर तो सहज ही मिल जाएंगे, पर ब्रह्मा जी का मंदिर विरले ही आपको देखने को मिलेगा। ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन त्रिमूर्तियों ने ही मिल कर इस पूरे संसार की रचना की हैं। वही इन त्रिदेवों में से भगवान विष्णु और शिव की पूजा तो पूरा संसार करता हैं, मगर ब्रह्मा जी की पूजा संसार में कही भी नहीं होती हैं। क्या आप जानते हैं। इसका क्या कारण हैं। नहीं जानते, तो आइए आज हम आपको बताते हैं।

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ब्रह्मा जी की पूजा करना वर्जित क्यों

आपको बता दें कि ब्रह्मा जी को सृष्टि के रचयिता होने के साथ ही साथ वेदों के भी देवता के रूप में माना जाता हैं। उन्होंने ही हमें चार वेदों का ज्ञान प्रदान किया हैं। वही हिंदू धर्म के मुताबिक ब्रह्मा जी की शारीरिक संरचना भी बहुत ही अलग हैं। वही इनकी पूजा कोई भी नहीं करता हैं। पृथ्वी लोक पर ब्रह्माजी के कई सारे मंदिर हैं। मगर वहां ब्रह्माजी की पूजा करना वर्जित माना जाता हैं।

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एक बार भगवान ब्रह्माजी के मन में धरती की भलाई के लिए यज्ञ करने का मन में विचार आया यज्ञ के लिए स्थान ढूढ़ा गया। वहीं उन्होने अपने एक कमल को निकाल कर धरती की ओर भेजा। वह जिस स्थान पर गिरा वहां पर ही ब्रह्मा जी का एक मंदिर बनाया गया हैं। वहीं पुष्कर में ब्रह्मा जी के दर्शन के लिए हर साल श्रद्धालु आते रहते हैं। मगर यहां कोई भी ब्रह्मा जी की पूजा नहीं करता हैं।

जब गायत्री को प्रकट कर किया विवाह

वही पौराणिक कथाओं के मुताबिक, ब्रह्मा जी यज्ञ करने के लिए जब पुष्कर पहुंचे गए। मगर उनकी पत्नी ठीक वक्त पर वहा नहीं पहुंचीं, और वहीं पूजा का शुभ मुर्हूत गुजरता जा रहा था। सभी देवी और देवता उस स्थान पर पहुंच गए थे। मगर उनकी पत्नी नहीं पहुंचीं। ऐसा कहा जाता हैं,कि जब शुभ मुहूर्त निकलने लगा तो कोई उपाय न देखकर ब्रह्मा जी ने नंदिनी गाय के मुख से गायत्री को प्रकट किया और उनसे विवाह कर अपना यज्ञ सम्पन्न किया।

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जब ब्रह्मा जी को मिला शाप

ऐसा कहा जाता हैं,कि जब उनकी पत्नी यज्ञ स्थान पर पहुंचीं, तो ब्रह्मा जी के बगल में किसी अन्य स्त्री को बैठे देखकर वो क्रोध में आ गईं और गुस्से में उन्होंने ब्रह्मा जी को शाप दे दिया, और कहा कि जाओ इस पूरे पृथ्वी लोक में तुम्हारी कहीं भी पूजा नहीं होगी। और जब बाद में जब उनका गुस्सा शांत करवाया गया तो उन्होंने कहा कि धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही ब्रह्मा जी की पूजा होगी।