काला पानी की सजा के नाम सुनते ही क्यों कांप जाते हैं लोग, जानिए कैसे दी जाती थी अंग्रेजों द्वारा सजा काला पानी की सजा

91

नई दिल्ली-न्यूज टुडे नेटवर्क : काला पानी की सजा के बारे में आपने तो खूब सुना होगा, लेकिन ये सजा कैसे दी जाती है क्या आप इसके बारे में जानते हैं ? हमारे देश में अंग्रेजों ने करीब 200 सालों तक हूकूमत की है। हमें आजादी दिलाने वाले वीर सैनानियों को कई सारी यातनाएं दी गई थी। अंग्रेज इन स्वतंत्रता सेनानियों को ऐसी यातनाएं देते थे, भारत की आजादी के लिए लाखों वीर सपूतों ने दर्द यातनाएं झेली, जेलों में उम्र गुजार दी। अंग्रजों ने भारतीय लोगों पर जो जुल्म ढाए है शायद ही हम वो सोच भी पाएं।

कठोर दंड देने के लिए मशहूर अँगरेज़ हुकूमत की सजाओं में एक मशहूर सजा थी और वो थी काला पानी की सजा। जिससे देखने वाले लोगों की रूह कांप जाए। काला पानी भी इन यातानाओं में से एक था। इस सजा के बारे में आपने भी काफी कुछ सुना होगा और आईये जानते है कितना दर्दनाक होती थी ये सजा।

kalapani

अंडमान निकोबार में बनी हुई थी जेल

अंग्रेजो की सबसे कठोर सजा देने की प्रक्रिया काला पानी ही था। आज हम आपको इस दर्दनाक सजा के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। काला पानी की सजा एक अलग तरह के जेल में दी जाती थी। ये जेल अंडमान निकोबार में बनी हुई थी। अब यह जेल एक राष्ट्रीय स्मारक मे तब्दील कर दी गई है लेकिन बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे वीरों की कहानियां आज भी इन जेलों की याद दिलाती है।

Cellular-Jail

भूखा-प्यास रखा जाता था जेल में

अंग्रेजो के राज मे हजारों सैनानियों को फांसी दी गई थी। साथ ही उन्हें तोपो के मुंह पर बांध कर उड़ा दिया गया था। इनमें से कुछ लोगों को तड़पा-तड़पा कर मारा जाता था। जिसे काला पानी कहा जाता था। इस सजा के तहत इंसान को एक छोटी सी सेल में रखा जाता था। जहां पर कोई नहीं होता था। और उसे इस जगह पर भूखा प्यासा मरने के लिए छोड़ दिया जाता था।

बता दें कि यह जेल अंडमान के पोर्ट ब्लेयर सिटी में है। इसके चारों तरफ पानी है और इंसान को यहां पर कोई दिखाई नहीं देता था। इस जेल मे बंद होनें वाले कैदियों को बेडियों से बांधकर रखा जाता था। और उन्हें भूखे प्यासे पूरे दिन काम कराया जाता था। इस काम को देखकर इंसान की रूह कांप जाती थी।